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खटक रही है जिला न्यायालय शिलान्यास कार्यक्रम से पूर्व सांसद डॉ. महेन्द्र नाथ पांडेय की दूरी

चंदौली में ऐतिहासिक कोर्ट शिलान्यास के दौरान दिग्गज नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा का केंद्र रही। सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने निमंत्रण न मिलने पर सरकार को घेरा, वहीं पूर्व सांसद महेंद्र नाथ पांडेय की दूरी ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

 
 

ऐतिहासिक कार्यक्रम से जनप्रतिनिधियों की दूरी

सांसद वीरेंद्र सिंह का उपेक्षा का आरोप

निमंत्रण नहीं मिलने पर जताई कड़ी आपत्ति

पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय भी रहे नदारद

विपक्षी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर उठा विवाद

चंदौली जिले में जिला मुख्यालय स्थित जिला न्यायालय परिसर का शिलान्यास समारोह ऐतिहासिक रूप से भव्य रहा। कार्यक्रम में देश और प्रदेश की न्यायपालिका की सबसे बड़ी हस्तियां मौजूद थीं। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उच्चतम न्यायालय के तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों सहित इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति ने इस आयोजन को गरिमामयी बना दिया। लेकिन, इस भव्यता के बीच जिले के वर्तमान सांसद और पूर्व सांसद डॉ. महेन्द्रनाथ पांडेय की अनुपस्थिति भाजपा के लोगों को भी खटक रही थी। 

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वहीं कार्यक्रम में भाजपा विधायक सुशील सिंह और रमेश जायसवाल के अलावा राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह और साधना सिंह भी कार्यक्रम में दिखायी दी थीं, लेकिन पूर्व सांसद का न रहना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा था। लोगों का कहना था कि आज के दिन पांडेयजी को रहना चाहिए था। 
 

पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय की दूरी
 भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और जिले के पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय की अनुपस्थिति भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। डॉ. पांडेय चंदौली के बड़े विकास कार्यों के प्रणेता माने जाते रहे हैं, लेकिन जिले के इतने महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवसर पर उनकी गैरमौजूदगी ने जनमानस में कई धारणाएं पैदा कर दी हैं। न्यायालय निर्माण के लिए कई बार अपने स्तर से पहल भी की थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व सांसद की जिले से यह बढ़ती दूरी उनके और चंदौली के विकास कार्यों के बीच कम होते जुड़ाव का संकेत दे सकती है। इस विषय पर उनका पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं लग सका।

न्यायिक ढांचे के लिए मील का पत्थर
 यह शिलान्यास कार्यक्रम न केवल चंदौली बल्कि प्रदेश के छह अन्य जिलों के लिए भी न्यायिक ढांचे के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शीर्ष न्यायाधीशों ने इसे आम जनता को न्याय दिलाने के लिए 'एक छत के नीचे सभी सुविधाएं' देने वाला क्रांतिकारी कदम बताया। हालांकि, समारोह का समापन होते-होते उपलब्धियों से अधिक चर्चा जनप्रतिनिधियों की गैरहाजिरी पर होने लगी।

क्या प्रोटोकॉल की हुई अनदेखी?
 सामान्य तौर पर, जब भी किसी जिले में देश के मुख्य न्यायाधीश या मुख्यमंत्री जैसे अतिविशिष्ट अतिथि आते हैं, तो स्थानीय सांसद और विधायक को आमंत्रित करना एक स्थापित प्रशासनिक प्रोटोकॉल है। विपक्ष का आरोप है कि इस मामले में प्रोटोकॉल को ताक पर रखकर इसे केवल सत्ता पक्ष का शक्ति प्रदर्शन बनाने की कोशिश की गई है। वहीं, आम जनमानस में यह सवाल तैर रहा है कि क्या विकास के मुद्दों पर भी पक्ष और विपक्ष के बीच की दूरी इसी तरह बनी रहेगी?


सांसद वीरेंद्र सिंह ने सरकार पर लगाया 'पार्टी विशेष' का ठप्पा
 समाजवादी पार्टी के वर्तमान सांसद वीरेंद्र सिंह की अनुपस्थिति ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। इस संबंध में जब उनसे मीडिया ने संपर्क किया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा, "मुझे इस ऐतिहासिक और सरकारी कार्यक्रम का कोई औपचारिक निमंत्रण प्राप्त नहीं हुआ।" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इस बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम को पूरी तरह से 'पार्टी विशेष' (भाजपा) का आयोजन बना दिया है। उनके अनुसार, प्रोटोकॉल के तहत क्षेत्रीय सांसद को आमंत्रित करना अनिवार्य था, लेकिन जानबूझकर विपक्ष के जनप्रतिनिधियों को दूर रखा गया।

लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर सांसद के तल्ख तेवर
 सांसद वीरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला करते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से उन्हें औपचारिक निमंत्रण मिलता, तो वे प्रोटोकॉल का सम्मान करते हुए मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री का स्वागत करने जरूर पहुंचते। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा, "ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री केवल भाजपा के मुख्यमंत्री बनकर रह गए हैं, न कि पूरे प्रदेश के।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के सकलडीहा विधायक को भी इस आयोजन से दूर रखकर सरकार ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया है।


 चंदौली जिला न्यायालय भवन का निर्माण भविष्य में न्यायिक प्रक्रिया को सुगम बनाएगा, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन इस उद्घाटन समारोह ने जिले की राजनीति के भीतर की दरार को भी स्पष्ट कर दिया है। जहां वर्तमान सांसद ने इसे अपमान की तरह लिया है, वहीं पूर्व सांसद की रहस्यमयी चुप्पी ने भाजपा के भीतर और बाहर कई कयासों को जन्म दे दिया है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में क्या प्रशासनिक अमला या सरकार इस विवाद पर कोई स्पष्टीकरण देती है, या फिर यह विवाद चंदौली की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की एक और नई गाथा बनकर रह जाएगा।

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