ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का रास्ता साफ: चंदौली से गाजीपुर तक थ्री-डी मैपिंग पूरी, अब शुरू होगा जमीन अधिग्रहण
चंदौली के सैयदराजा से गाजीपुर के महाराजगंज तक बनने वाले 42 किमी लंबे ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे की थ्री-डी मैपिंग पूरी हो गई है। अब 28 गांवों की जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे पूर्वांचल में कनेक्टिविटी नई ऊंचाइयों पर पहुँचेगी।
थ्री-डी मैपिंग का कार्य संपन्न
3000 करोड़ का भारी निवेश
चंदौली के 28 गांव होंगे शामिल
जमीन अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया शुरू
पूर्वांचल में कनेक्टिविटी का नया विस्तार
चंदौली-गाजीपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट को मिली हरी झंडी: मैपिंग का काम पूरा, अब मुआवजे की बारी
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र और प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। चंदौली के सैयदराजा से लेकर गाजीपुर के महाराजगंज तक बनने वाले 'ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे' के निर्माण की प्रक्रिया अब अपने अगले चरण में प्रवेश कर गई है। लगभग 3000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए 'थ्री-डी मैपिंग' का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है। इस डिजिटल खाके के तैयार होने के बाद अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने जमीन अधिग्रहण और किसानों के मुआवजे के निर्धारण की कागजी कार्यवाही तेज कर दी है।

एक्सप्रेस-वे का रूट और प्रभावित होने वाले 28 गांव
यह एक्सप्रेस-वे चंदौली और गाजीपुर के बीच की दूरी को न केवल कम करेगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह मार्ग चंदौली जनपद के कुल 28 गांवों से होकर गुजरेगा। इसमें सकलडीहा विकासखंड के 5 गांव—एवती, जिगना, सिसौरा, बधरी व रामदासपुर शामिल हैं। वहीं, सदर विकासखंड के 23 गांवों—रैपुरी, वीरभानपुर, सिकता, सबल जलालपुर, बबुरा खास, डिग्पी, बरडीहा, अमडा, हरिपुर, औरड्या पट्टी गुलाब, अराजी औरड्या, इमिलिया, बरहनी, कैथी, बेलगहना, जेवरी पट्टी, भुआलपुर, लीलाराय, रेवसा, छतेम मरुई, बगही, कुंभापुर और बख्तू राय की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।
पूर्वांचल की कनेक्टिविटी में मील का पत्थर साबित होगा प्रोजेक्ट
लगभग 42 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण आधुनिक तकनीक और डिजिटल खाके के आधार पर किया जा रहा है। गाजीपुर के महाराजगंज में इस एक्सप्रेस-वे का मुख्य 'गेटवे' बनाया जाएगा, जहाँ इसे वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन से सीधे कनेक्ट किया जाएगा। इस कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि गोरखपुर, मऊ और आजमगढ़ की ओर से आने वाले राहगीर वाराणसी शहर के जाम में फंसे बिना सीधे चंदौली और बिहार की सीमा तक पहुँच सकेंगे। अब तक राहगीरों को जमानिया या सैदपुर के घुमावदार रास्तों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन इस ग्रीन फील्ड मार्ग के बनने से समय और ईंधन दोनों की भारी बचत होगी।
ये हैं आगामी योजनाएं
एनएचएआई (NHAI) के उप प्रबंधक संकेत मंगला ने बताया कि एक्सप्रेस-वे के निर्माण हेतु थ्री-डी मैपिंग का तकनीकी कार्य पूरा हो चुका है, जिससे प्रोजेक्ट का मार्ग पूरी तरह स्पष्ट हो गया है। अब जिला प्रशासन के सहयोग से संबंधित गांवों की भूमि की पैमाइश और मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मार्ग पर सुरक्षा के मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा, जिसमें आधुनिक डिवाइडर, सर्विस लेन और आपातकालीन सुविधाएं शामिल होंगी। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।
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