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ITI में न पढ़ाई.. न ट्रेनिंग.. केवल खानापूर्ति, साहब को कमीशन देकर लूटी जाती है छात्रवृत्ति..कागजों पर 75% हाजिरी

चंदौली के ITI संस्थानों में छात्रवृत्ति के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। 75 फीसदी हाजिरी अनिवार्य होने के बावजूद निरीक्षण में कॉलेज खाली मिले। लाखों की छात्रवृत्ति जारी होने पर अब उठ रहे हैं गंभीर सवाल।
 

चंदौली ITI छात्रवृत्ति में अनियमितता का मामला

75 प्रतिशत अनिवार्य उपस्थिति पर उठे सवाल

खाली कॉलेजों में बांटी गई लाखों छात्रवृत्ति

ITI संस्थानों की जांच के आदेश जारी

प्रवेश और हाजिरी के खेल की हकीकत

चंदौली जिले के ITI संस्थानों में छात्रवृत्ति को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी नियमों के मुताबिक छात्रवृत्ति पाने के लिए छात्रों की 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। लेकिन जिले के कई संस्थानों की जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। निरीक्षण के दौरान कई कॉलेज पूरी तरह बंद मिले, तो कुछ खुले होने के बावजूद खाली पड़े थे। कई जगह केवल दो-तीन संविदा कर्मचारी ही पूरे संस्थान को चलाते दिखे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब छात्र ही नहीं हैं, तो पढ़ाई और ट्रेनिंग कैसे हो रही है?

43 संस्थानों में लाखों के खेल की आशंका
चंदौली जिले में कुल 43 ITI संस्थान संचालित हो रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र तकनीकी शिक्षा पाने के लिए दाखिला लेते हैं। सरकार की ओर से हर साल इन छात्रों के लिए लाखों रुपये की छात्रवृत्ति जारी की जाती है। लेकिन धरातल पर छात्रों की गैरमौजूदगी ने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। जब कर्मचारियों से छात्रों के गायब होने की वजह पूछी गई, तो उन्होंने प्रवेश प्रक्रिया चालू होने और बारिश का बहाना बना दिया।

पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों ने चौंकाया
सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024-25 में कई प्राइवेट ITI कॉलेजों को लाखों रुपये की छात्रवृत्ति जारी की गई है। आंकड़ों में गंगा ITI को लगभग 59 लाख रुपये और आइडियल ITI को करीब 22 लाख रुपये की छात्रवृत्ति दिखाई गई है। इसी तरह आजाद ITI को 33 लाख, शारदा ITI को 15 लाख और डीपीएस ITI को भी लगभग 15 लाख रुपये की राशि आवंटित हुई है। अब सवाल यह है कि जब बच्चे नियमित कॉलेज आ ही नहीं रहे, तो 75 फीसदी हाजिरी का सत्यापन किसने और कैसे किया और कैसे छात्रवृत्ति देने का फैसला लिया गया?

जांच के बाद सख्त कार्रवाई का आश्वासन
मामला तूल पकड़ने के बाद ITI कॉलेज के नोडल अधिकारी ने जांच की बात कही है। उन्होंने भरोसा दिया है कि सभी संस्थानों की जमीनी स्थिति की पड़ताल कराई जाएगी। अगर किसी कॉलेज में गड़बड़ी पाई गई, तो उसकी रिपोर्ट बनाकर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी आम है कि कुछ लोग छात्रवृत्ति के लालच में बच्चों का दाखिला करवा लेते हैं। बाद में स्कॉलरशिप आने पर आपस में बंदरबांट कर ली जाती है। अब देखना होगा कि विभागीय जांच में हाजिरी बायोमेट्रिक रिकॉर्ड से मेल खाती है या नहीं।

आपको बता दें कि रोजगार को बढ़ावा देने व युवाओं को स्किल बनाने के नाम पर चल रही सरकारी योजनाओं में इसी वजह से सरकार को नाकामी हासिल हो रही है, क्योंकि आईटीआई जैसे जरूरी संस्थान चलाने वाले मालिक व अधिकारी केवल अपनी जेब भरने की फिराक में रहते हैं। वहीं ऐसे युवाओं को सोचना होगा कि अगर वे बिना किसी मेहनत के डिग्री हासिल करना चाहते हैं तो उनका भविष्य क्या होगा और उनको केवल डिग्री के आधार पर आजकल नौकरी नहीं मिलने वाली है। उनको क्लास और प्रैक्टिकल पर फोकस करना होगा। 

जिलाधिकारी से अपील की जा रही है कि जिले के सभी आईटीआई कॉलेजों की जांच करानी चाहिए ताकि वहां के एडमिशन व स्कॉलरशिप के नाम पर हो रहे घोटाले की पोल खोली जा सके और बंटरबांट करने वालों पर शिकंजा कसा जा सके। 

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