जिले का पहला ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टलMovie prime

सत्ता का नशा और चापलूसी के चक्कर में नाम बदलने की हो रही राजनीति, ऐसी है लोगों की राय

अजय राय ने याद दिलाया कि चंदौली के सांसद इसे वाराणसी देहात कहलवाना चाहते हैं तो विधायक सुशील सिंह बाबा कीनारामनगर बनवाना चाह रहे हैं, जबकि रमेश जायसवाल के लगता है कि जिले का नाम वाराणसी गंगापार होना चाहिए।
 

काम न करना पड़े इसलिए शुरू हो गयी है नाम बदलने की राजनीति

चंदौली के नेताओं को लोगों की नसीहत

दशा व दिशा बदलने की करें पहल

सांसद-विधायक व भाजपा के लोगों के लिए खास नसीहत

चंदौली जिले के सत्ताधारी दलों के नेता जब पार्टी सत्ता में रहती है तो एक अलग ही नशे में चूर रहते हैं। सत्ताधारी दल के नेता जनहित व जिले की बड़ी समस्याओं की जिम्मेदारी दूसरे दलों पर डालकर केवल हवाहवाई बयानबाजी और अपने सरकार के गुणगान में मस्त रहते हैं। सरकारी अधिकारियों के साथ मीटिंग में भी वे केवल दिशा निर्देश तक सीमित रहते हैं, ऐसा लगता है जैसे की उनके पास अफसरों की नकेल कसने का पावर ही नहीं है।

कुछ ऐसा ही राग आजकल मुगलसराय के विधायक रमेश जायसवाल अलाप रहे हैं। चंदौली जिले में सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़कों की स्थिति सुधरने से ज्यादा उनको चंदौली जिले के नाम खटक रहा है। मुगलसराय के बाद अब भाजपा नेता जिले और कस्बे का नाम बदलने की जल्दबाजी में हैं।  मुख्यमंत्री के साथ मीटिंग में सुशील सिंह ने सैयदराजा का नाम बदलकर शिवाजीनगर करने की मांग रखी तो रमेश जायसवाल ने चंदौली को वाराणसी गंगापार नाम देने की आवाज उठाने लगे।

अब भाजपा नेताओं की सोच पर जिले के लोग सवाल उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि नाम बदलने की राजनीति छोड़कर भाजपा नेताओं को जिले के हालात बदलने की कोशिश करनी चाहिए।

कम्युनिष्ट विचारधारा के समर्थक नेता अजय राय का कहना है कि भाजपा विधायकों को जिले के आदिवासियों के लिए लागू वनाधिकार कानून लागू करा कर पट्टा दिलाने, जिले में  गुणवत्तापूर्ण सड़कें बनवाने, जिले में शिक्षा का स्तर सुधारने,  भ्रष्टाचार में लिप्त व अभाव ग्रस्त जिला अस्पताल का कायाकल्प कराने,  कम मुआवजा देकर जबरन किसानों की भूमि अधिग्रहण करने के खिलाफ आवाज उठाने, जिले भर की जर्जर नहरों व माइनरों की सफाई कराने के साथ-साथ जिले में आधुनिक रोडवेज बस स्टैंड बनवाने पर ध्यान देना चाहिए।
अजय राय ने कहा कि मायावती की सरकार में वाराणसी जनपद को काटकर नया जनपद चंदौली सबसे  पहले बना दिया था, लेकिन  मुलायम सिंह की सरकार बनी तो चंदौली जनपद को खत्म कर वाराणसी जनपद में मिला दिया गया। उसके बाद मायावती की सरकार जब पुनः उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ हुई तो चंदौली जनपद को पुनः बहाल कराया गया।
अब चंदौली जनपद का स्थाई रूप से बन गया और तमाम सुविधाएं विकसित हो रही हैं तो चंदौली के कुछ विजन विहीन नेता जिले के अस्तित्व पर सवाल उठा रहे हैं।

अजय राय ने याद दिलाया कि चंदौली के सांसद इसे वाराणसी देहात कहलवाना चाहते हैं तो विधायक सुशील सिंह बाबा कीनारामनगर बनवाना चाह रहे हैं, जबकि रमेश जायसवाल के लगता है कि जिले का नाम वाराणसी गंगापार होना चाहिए।
चंदौली जिले के एक अधिवक्ता ने कहा कि चंदौली जिले का नाम बदलने की बात करना चापलूसी की राजनीति का द्योतक है। वाराणसी से चंदौली को फिर से जोड़कर मोदी जी के नाम का फायदा उठाना चाहते हैं। ये तीनों नेता सत्ताधारी दल के हैं, लेकिन अपनी ढपली और अपना राग अलाप रहे हैं। नेताओं को चाहिए कि पहले पार्टी फोरम में बैठकर तय कर लें तब जनता के बीच य सदन में इस तरह की बयानबाजी करें।  

एक किसान ने कहा कि डबल इंजन की भाजपा की सरकार जो भी विकास का दावा करती है, उसे नहरों और माइनरों की हालत देखकर या धान खरीद केन्द्र की हालत देखकर मूल्यांकन करिए तो आपको जवाब मिल जाएगा। जिले के अधिकारी और सत्ताधारी दल के विधायक-सांसद और संगठन के पदाधिकारी सब कुछ जानकर भी धृतराष्ट बनकर बैठे हैं। किसी में दम नहीं है कि ताल ठोककर किसानों की बात अधिकारियों की मीटिंग में कहें। किसान दिवस के नाम पर किसानों को बेवकूफ बनाया जाता है। पिछले मीटिंग की बातों को दरकिनार कर हर मीटिंग में डीएम या सीडीओ निर्देश देने की खानापूर्ति करते हैं।

स्नातक की परीक्षा पास करके रोजगार खोज रहे नवयुवक मनोज कुमार का कहना है कि जब हम बात हमारे देश के भारी उद्योग मंत्री पूरे देश में कल कारखाना लगवाने के लिए दौरा कर रहे हैं, क्या चंदौली जिले में उनके मंत्रालय के लिए कोई स्कीम नहीं है, जिससे जिले के हजार दो हजार लोगों को अपने जिले में रोजगार मिल सके। जिले में रोजगार के मौके न  होने के कारण नौजवानों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है।

इसे भी पढ़ें - शिक्षक संघ ने विधायक की मांग को नकारा, बोले- चंदौली के नाम से छेड़छाड़ मंजूर नहीं ​​​​​​​
 बबुरी इलाके के एक शिक्षक ने कहा कि चंदौली जनपद में सरकार की बहुचर्चित जल मिशन योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। यहां सत्तापक्ष के नेताओं के कारखास ठेके में हिस्सेदारी लेकर मौजकाट रहे हैं। लंबे समय से प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना बंद है। गांव में आवास योजना के लाभ में कमीशनखोरी जोरों पर है। नौगढ़ के कई आवास लटके हैं। शौचालयों का हाल हर गांव में किसी से छिपी नहीं है। मनरेगा में गांव व ब्लॉक में काम कैसे हो रहा है और कितना कमीशन देने पर काम मिलता है और फिर किसकी-किसकी पूजा करने पर पेमेंट होता है..ये कहानी कोई भी इमानदार ग्राम प्रधान, बीडीसी या जिला पंचायत सदस्य बता देगा। मनरेगा में काम कराना है तो बिना कमीशन के कुछ नहीं होगा। जो नेता इमानदारी से गरीबों की मजदूरी नहीं दिलवा पा रहे हैं, वो जिले के लिए क्या सोचेंगे। उनको केवल अपनी सीट बचाए रखने और अगले चुनाव के टिकट की चिंता है।

वहीं जिले के शिक्षकों ने भी प्रदेश के मुख्यमंत्री से उम्मीद जतायी है कि वह नाम बदलने का चक्कर छोड़कर इन जनप्रतिनिधियों को विकास कार्यों की इमानदारी से मानिटरिंग करने की नसीहत देंगे। जिससे लोगों को सरकार से नयी उम्मीद दिखायी देगी। पहले यहां के लोगों की बड़ी समस्याओं को हल कराना चाहिए और जिले को एक नया रूप देना चाहिए। जिले की नयी पहचान अपने आप बन जाएगी।

चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*