कफ सिरप कांड का चंदौली कनेक्शन : बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह के गहरे राज और 'डार्क सीक्रेट'
कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट से बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह का जुड़ाव
चंदौली के कैथी गांव निवासी आलोक सिंह का परिवार और संपत्ति
धनंजय सिंह का बायां हाथ कहे जाने वाले आलोक सिंह के गहरे राज
बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह के पिता और चाचा का पुलिस कनेक्शन
चंदौली जिले का भी कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट से खास रिश्ता दिख रहा है। कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट के मामले में गिरफ्तार और पुलिस से बर्खास्त एसटीएफ सिपाही आलोक सिंह आजकल सुर्खियों में है। चंदौली के बलुआ क्षेत्र के कैथी गांव निवासी आलोक सिंह के पकड़े जाने के बाद उनकी पृष्ठभूमि और आपराधिक गतिविधियों के बीच के विरोधाभास ने सभी को चौंका दिया है। आलोक सिंह काफी पढ़े-लिखे और संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि, गलत काम करने की वजह से वह एसटीएफ से बर्खास्त हो गया था। पुलिस अब कफ सिरप तस्करी केस में आलोक सिंह के स्थानीय नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।
परिवार की पृष्ठभूमि और पुलिस कनेक्शन
आलोक सिंह का परिवार कैथी गांव में अपनी अच्छी छवि के लिए जाना जाता है। उनके परिवार के पास पैतृक गांव में केवल छह बीघा जमीन है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी बताया कि परिवार के पास पांच से सात बीघा जमीन है। संपत्ति भले ही सीमित हो, लेकिन यह परिवार काफी पढ़ा-लिखा है।
चंदौली के कैथी गांव निवासी आलोक सिंह का परिवार और संपत्ति
— Chandauli Samachar (@chandaulinews) December 2, 2025
धनंजय सिंह का बायां हाथ कहे जाने वाले आलोक सिंह के गहरे राज
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आलोक सिंह के पिता भी पुलिस विभाग में कार्यरत थे, लेकिन गलत काम करने के कारण उन्हें भी बर्खास्त कर दिया गया था। परिवार में पुलिस और सरकारी नौकरी का मजबूत कनेक्शन रहा है। आलोक के एक चाचा दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) हैं, जबकि दूसरे चाचा चहनियां ब्लाक में कार्यरत हैं। परिवार में लगभग आधा दर्जन लोग नौकरी पेशा में हैं, जिनमें से कई सरकारी नौकरी में हैं।
लखनऊ में 5 करोड़ का आलीशान मकान
आलोक सिंह ने अपने गांव और अपनी पैतृक जड़ों से दूरी बना रखी थी। ग्रामीणों ने बताया कि वह 1996 से ही घर से बाहर रह रहे थे और लखनऊ में निवास करते थे। जहां पैतृक गांव में परिवार के पास केवल छह बीघा जमीन है, वहीं आलोक सिंह ने लखनऊ में 5 करोड़ रुपये का एक आलीशान मकान बनवाया है।
हालांकि, गांव वालों के बीच उनकी छवि अच्छी थी। वह कभी-कभार ही गांव आते थे, लेकिन परिवार में कोई बड़ा आयोजन या निमंत्रण होने पर जरूर शामिल होते थे। ग्रामीणों को उनकी एसटीएफ में नौकरी लगने की भी जानकारी थी। वर्तमान में, गांव के घर पर केवल उनके चाचा (जो ब्लॉक में कार्यरत हैं) ही रहते हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य बाहर ही रहते हैं।
एसटीएफ से बर्खास्तगी और धनंजय सिंह से नजदीकी
आलोक सिंह के गहरे राज खुलने के बाद उनकी बर्खास्तगी और राजनीतिक संबंधों का खुलासा हुआ है। एसटीएफ से बर्खास्तगी के बाद, आलोक सिंह ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह का दामन थाम लिया था। राजनीतिक गलियारों में उनकी नजदीकियां इतनी बढ़ गईं कि आलोक सिंह को धनंजय सिंह का बायां हाथ माना जाने लगा।
हाल ही में, बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह ने कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट से जुड़ने के तरीके और अपने नेटवर्क के संबंध में गहरे राज उगले हैं। पुलिस अब इन खुलासों के आधार पर कफ सिरप तस्करी केस में उनके स्थानीय नेटवर्क और सिंडिकेट की विस्तृत जांच कर रही है।
आलोक सिंह का मामला एक पढ़ा-लिखा पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति का तस्करी जैसे संगठित अपराध में शामिल होने का विरोधाभास दिखाता है। एक ओर जहां उनके परिवार की गांव में अच्छी छवि है और वे सरकारी नौकरियों से जुड़े हैं, वहीं आलोक सिंह ने गलत काम करने के कारण न सिर्फ अपनी नौकरी गंवाई, बल्कि अपने पिता की तरह बर्खास्तगी का दाग भी लिया। लखनऊ में 5 करोड़ का आलीशान मकान और पैतृक गांव की मामूली संपत्ति के बीच का अंतर उनके अवैध धंधों की ओर इशारा करता है, जिसके गहरे राज अब पुलिस के सामने आ रहे हैं।
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