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चंदौली के DM व CMO के बीच क्या हुआ कि मंत्री को कहना पड़ा- अलग से बात करेंगे
 

 
चंदौली जिले के सांसद व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेन्द्र नाथ पांडेय के द्वारा ली जा रही है दिशा बैठक में जिस तरह से जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी सवाल-जवाब करते नजर आए उससे यह तो जाहिर हो गया कि या तो जिलाधिकारी महोदय को सीएमओ की कार्यशैली पसंद नहीं या फिर जिलाधिकारी सीएमओ से कुछ ज्यादा ही खफा हैं। 

इस मीटिंग में मौजूद लोगों से मिली जानकारी के आधार पर बताते चलें कि जिले के सांसद वह भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्री के दिशा बैठक की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग को जब जनप्रतिनिधियों द्वारा कई प्रश्न उठाकर सीएमओ को घेरने का काम किया जा रहा था, तभी जिलाधिकारी द्वारा सीएमओ के कार्य करने के तरीके पर कुछ प्रश्न चिन्ह लगाया गया, जिसका जवाब देते हुए सीएमओ ने बताया कि मेरे द्वारा सारे मामलों में कार्यवाही की गई हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी कार्य हैं जो कि मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। उसमें वह कुछ नहीं कर सकते हैं। इस पर जिलाधिकारी असहज होते दिखे।  

मीटिंग में शामिल सूत्र बताते हैं कि इसी तरह जिलाधिकारी ने जो भी सवाल किए सीएमओ ने उसका उसी अंदाज में जवाब दे दिया, जिससे दोनों अफसरों में तनातनी जैसी फीलिंग दिखने लगी और ऐसी हालत में जिलाधिकारी को चुप्पी साधनी पड़ी। ऐसी हालत में जिले के सांसद माहौल को बिगड़ते देख टालने की कोशिश की गयी और कहा गया कि  स्वास्थ्य विभाग की बैठक अलग से सर्किट हाउस में की जाएगी, जिसमें जनपद के दोनों सीएमएस व स्वास्थ्य विभाग की अधिकारी मौजूद रहेंगे।
 

इस बैठक के बाद जानकारी मिली कि इस मामले पर मंत्री जी के सामने दोनों सीएमएस चकिया व जिला अस्पताल द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रश्नों के उत्तर के बाद मामले का समाधान हो गया और जिलाधिकारी व जनप्रतिनिधियों की शिकायतें दूर हो गयीं।


वहीं दबे स्वर में यह भी सुना जा रहा था कि जिलाधिकारी द्वारा किसी दूसरी बात को लेकर नाराज होने के कारण इस प्रकार की बातें मीटिंग में आयीं हैं, क्योंकि जिला अधिकारी के मन मुताबिक कार्य न करने के कारण सीएमओ शायद निशाने पर रहते हैं और जिलाधिकारी व सीएमओ के जवाब सवाल अक्सर चर्चा के विषय बना करते हैं।  

अब देखना है कि इस नयी चर्चा के बाद दोनों अधिकारी किस प्रकार की रवैया अपनाते हैं। जिलाधिकारी संजीव सिंह चंदौली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी पर कोई विशेष कृपा दिखाते हैं या उसे सामान्य बात समझ कर भूल जाते हैं। चाहे जो भी आने वाले एक दो महीने में तय होगा कि कौन सा अधिकारी फ्रंटफुट पर रहेगा व कौन बैकफुट पर जाएगा।