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सड़क बन जाती है पर स्कूल नहीं बनता, ऐसा है नौगढ़ में NOC का खेल
 

चंदौली जिले नौगढ़ वन क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी एवं वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से सड़कों का निर्माण तो कई नियमों को ताख पर रखकर किया जा रहा है जबकि वन क्षेत्र में होने वाले अन्य विकास कार्यों के लिए एनओसी अनिवार्य कर दी गयी है, जिससे कई जरूरी कार्य अटके हुए हैं। 

 बताते चलें कि जनपद में इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है कि वन क्षेत्र में यदि सड़कों का निर्माण किया जा रहा है तो किस के आदेश पर और किन के द्वारा एनओसी प्रदान की जा रही है, जबकि सरकार की गाइड लाइन के अनुसार यदि वन क्षेत्र में कोई भी कार्य किया जाता है तो उसके लिए विधिवत राज्य एवं केंद्र सरकार से परमिशन लेकर ही सड़कें एवं अन्य कार्य किए जा सकते हैं। 

जब वन विभाग के अधिकारियों से बातचीत करके यह जानने का प्रयास किया गया कि किन-किन सड़कों को बनाने के लिए वन विभाग की ओर से या सरकार की ओर से एनओसी प्राप्त है, इसकी उनको कोई जानकारी नहीं है। इसके बारे में वह कुछ भी बताने में वह असमर्थ रहे। वही पीडब्ल्यूडी द्वारा  नौगढ़ में वन क्षेत्र में बनने वाली सड़कों पर पर्याप्त धनराशि खर्चा करके सड़क बनाने का कार्य किया जाता रहा है, तो यह सब किसकी परमिशन पर हो रहा है।

 इस संबंध में चर्चाएं हैं कि वन विभाग व पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की सांठगांठ से जो काम सरकार के परमिशन से होने चाहिए उन कार्यों को आपसी तालमेल व बंटरबांट से ऐसे ही कर लिया जाता है। वहीं जनपद में यह भी मिसाल है कि बच्चों को पढ़ने के लिए गोड़टुटवा प्राथमिक विद्यालय तो बनकर तैयार हो गया, और जब छत ढालने की बात आयी तो वन विभाग ने आपत्ति लगा दी, जिससे अब तक स्कूल को छत नसीब नहीं हो पाई। वन विभाग द्वारा इस विद्यालय को एनओसी नहीं दी गयी है। 

छत वाले कमरे के न होने के कारण किसी तरह अध्यापक व छात्र पठन-पाठन का कार्य कराते रहते हैं,  लेकिन यह विद्यालय आज भी गोड़टुटवा के नाम पर संचालित है। वन विभाग को बच्चों के स्कूल से क्या आपत्ति है और शिक्षा विभाग व अन्य आला अफसर इसके लिए पहल क्यों नहीं कर रहे हैं..यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही है। 

सोचने की बात है कि पीडब्ल्यूडी को बिना एनओसी के सड़कों के निर्माण करने दने वाले वन विभाग स्कूलों के लिए क्यों अडंगेबाज बना हुआ है और विभागीय समीक्षा व मीटिंग में ऐसी बातों को अधिकारी क्यों नहीं बोलते हैं। हर कोई इसके पीछे कमीशन व जेब गर्म करने की कल्चर को दोषी मान रहा है। अगर स्कूल बनाने वाले भी साहब की जेब गर्म करेंगे तो हो सकता है परमीशन मिल जाए।  

अब देखना है कि ऐसे कृत्य करने वाले लोगों के खिलाफ प्रशासन द्वारा क्या किया जाता है। 
इस मामले को प्रशासन व सरकार द्वारा किस प्रकार संज्ञान में लिया जाता है और बिना परमिशन के किए गए कार्य और धन का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों होने पर सरकार द्वारा किस प्रकार लगाम लगाया जाता है।