अब चकिया में फर्जीवाड़ा कर रहा है कानूनगो जितेंद्र बहादुर सिंह, ऐसे लगने लगे हैं आरोप
सकलडीहा के बाद अब शहाबगंज में कर रहा है मनमाना काम
डीएम साहब कानूनगो पर फर्जी पैमाईश का करने का आरोप
जिस बंजर जमीन पर लेखपाल ने की कार्यवाही
अब बंजर जमीन पर प्रधान को दिलाया जा रहा है कब्जा
चंदौली जनपद के चकिया तहसील के अंतर्गत सिंहरौल गांव में कानूनगो की कथित मनमानी को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश तेज हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय कानूनगो जितेंद्र बहादुर सिंह निजी स्वार्थवश गांव के प्रधान को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि जिस भूमि को लेकर विवाद है, वह खतौनी में स्पष्ट रूप से बंजर दर्ज है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान द्वारा इस भूमि पर कब्जा किए जाने के कारण क्षेत्रीय लेखपाल ने उसके खिलाफ धारा 67(1) के तहत कार्रवाई भी की थी, लेकिन कानूनगो अब विवादित भूमि को प्रधान का निजी दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की है कि पैमाइश के दौरान नियमों को ताक पर रखकर क्षेत्रीय लेखपाल को शामिल नहीं किया गया, बल्कि एक तीसरे व्यक्ति को मौके पर लाकर पैमाइश कराई जा रही है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसका उद्देश्य प्रधान को क्लीन चिट देना प्रतीत होता है। ग्रामीणों के अनुसार, खतौनी में दर्ज बंजर भूमि को पैमाइश रिपोर्ट में गायब या परिवर्तित दिखाने की कोशिश की जा रही है, जो गंभीर अनियमितता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस प्रकार की गलत कार्रवाई से न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है, बल्कि गांव के माहौल में तनाव और मारपीट जैसी स्थितियाँ भी उत्पन्न होती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कानूनगो जितेंद्र बहादुर सिंह इससे पहले सकलडीहा तहसील में भी चर्चित रहे हैं और शहाबगंज क्षेत्र में भी उनके कथित कारनामों से लोग परेशान रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने उप जिलाधिकारी चकिया और जिलाधिकारी चंदौली से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र और निष्पक्ष कार्यवाही नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को विवश होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि बंजर भूमि पंचायत की संपत्ति है, और यदि इस पर कब्जे या फर्जी रिपोर्टिंग की अनुमति दी गई, तो यह अन्य मामलों में भी गलत मिसाल पेश करेगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पैमाइश दोबारा पारदर्शी तरीके से की जाए, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गांव में विश्वास और कानून व्यवस्था कायम रह सके।
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