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जिसका अंदेशा था वही हुआ: PM मोदी के विदेश रवाना होते ही पेट्रोल-डीजल का झटका, कांग्रेस बोली- 'चुनाव खत्म, वसूली शुरू'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे पर जाते ही देश में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य पूर्व संकट के बीच तेल कंपनियों ने जनता पर महंगाई का बोझ डाल दिया है, जिस पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है।

 
 

दिल्ली में पेट्रोल ₹3.14 और डीजल ₹3.11 प्रति लीटर महंगा

सीएनजी की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम की वृद्धि

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल $100 के पार पहुँचा

डॉलर के मुकाबले रुपया ₹95 के स्तर के पार गिरा

कांग्रेस का तंज: 'महंगाई मैन' मोदी का जनता पर हंटर

देश की जनता पर शुक्रवार की सुबह महंगाई का एक बड़ा बम फूटा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे पर रवाना होते ही तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। नई दरों के लागू होने के साथ ही राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 3.14 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 97.77 रुपये हो गई है। वहीं, डीजल की कीमतों में 3.11 रुपये का इजाफा किया गया है, जिसके बाद दिल्ली में डीजल अब 90.67 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। केवल वाहन ईंधन ही नहीं, बल्कि मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता के कारण सीएनजी (CNG) की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है, जिससे दिल्ली में सीएनजी की नई दर 79.09 रुपये प्रति किलोग्राम पहुँच गई है।

अंतरराष्ट्रीय संकट और तेल कंपनियों का तर्क
सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की औसत कीमत पिछले तीन महीनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है। अप्रैल 2026 में यह औसत 114 डॉलर और मई में 104 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई।

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केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले ही संकेत दिए थे कि तेल कंपनियों को रोजाना 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हो रहा है। कंपनियों का दावा है कि यदि खुदरा कीमतों में यह बढ़ोतरी नहीं की जाती, तो एक तिमाही में घाटा 1 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता था। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का 95 रुपये के स्तर के पार गिरना भी आयात लागत बढ़ने का एक प्रमुख कारण बना है।

विपक्ष का प्रहार: 'महंगाई मैन' मोदी और वसूली की राजनीति
ईंधन की कीमतों में इस अचानक वृद्धि पर विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि वर्षों तक जब अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें कम थीं, तब सरकार ने उपभोक्ताओं को लाभ नहीं दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जैसे ही विधानसभा चुनाव समाप्त हुए, सरकार ने अपनी "वसूली" शुरू कर दी है।

कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल से भी तीखी प्रतिक्रिया आई, जिसमें प्रधानमंत्री को 'महंगाई मैन' संबोधित करते हुए कहा गया कि आज फिर जनता पर हंटर चलाया गया है। विपक्ष का आरोप है कि तेल की कीमतों में इस वृद्धि से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे आम उपभोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी और इस वित्त वर्ष में महंगाई दर 6 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।

इन देशों के लिए निकले हैं पीएम मोदी 
एक ओर जहाँ देश में महंगाई की चर्चा है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अबू धाबी के लिए रवाना हो गए। उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और यूएई के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीएम मोदी राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश पर महत्वपूर्ण चर्चा करेंगे। उम्मीद है कि इस दौरान एलपीजी और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व को लेकर दो अहम समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर होंगे।

अबू धाबी के बाद प्रधानमंत्री नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और अंत में इटली जाएंगे। इस मैराथन दौरे में भारत-नॉर्डिक समिट और यूरोपीय व्यापारिक लीडर्स के साथ बैठकें शामिल हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री ने रवाना होने से पहले देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग और अनावश्यक खर्चों को टालने की अपील की थी, जो देश की वर्तमान आर्थिक चुनौतियों की ओर इशारा करती है।

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