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आसान नहीं है नरेन्द्र मोदी बनना: विरोधी आलोचनाओं से परे लेते रहे ऐतिहासिक फैसले, बनाते गए वैश्विक पहचान

वडनगर की साधारण गलियों से निकलकर तीन बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प है। संगठन के जमीनी कार्यकर्ता से लेकर कड़े फैसलों और अंतरराष्ट्रीय पहचान तक, जानिए पीएम मोदी के जीवन से जुड़ी खास बातें।
 

वडनगर से दिल्ली तक का ऐतिहासिक राजनीतिक सफर

आरएसएस प्रचारक से तीन बार प्रधानमंत्री बनने की कहानी

370 हटाने से लेकर सीएए तक के बड़े फैसले

वैश्विक स्तर पर पीएम नरेंद्र मोदी का बढ़ा कद

फैसलों के साथ जुड़ा विरोध और नीतिगत बदलाव का दौर

17 सितंबर 1950 को गुजरात के छोटे से कस्बे वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी का जीवन साधारण शुरुआत से असाधारण मुकाम तक पहुंचने की एक अनोखी कहानी है। उनका सार्वजनिक जीवन किसी बड़े राजनीतिक घराने के बिना शुरू हुआ। बचपन में परिवार की चाय की दुकान पर काम करने से लेकर किशोरावस्था के बाद देश भ्रमण और फिर अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ना, उनके शुरुआती जीवन के मुख्य आधार रहे।

1972 में वे संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बने और लंबे समय तक जमीन पर रहकर संगठन को मजबूत करने का काम किया। इसके बाद 1987 में उन्हें गुजरात भारतीय जनता पार्टी का महासचिव बनाया गया। अहमदाबाद नगर निगम चुनाव से लेकर 1995 के विधानसभा चुनाव तक उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर काम किया। यानी प्रधानमंत्री बनने से बहुत पहले उनके पास संगठन में काम करने का दशकों का लंबा अनुभव मौजूद था।

PM Modi Birthday

जमीनी कार्यकर्ता से 13 साल मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी की असली प्रशासनिक यात्रा साल 2001 में शुरू हुई, जब उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने करीब 13 वर्षों तक गुजरात की कमान संभाली और विकास के कई मॉडल पेश किए। इसके बाद 2014 के राष्ट्रीय चुनाव में भाजपा ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया और 26 मई 2014 को उन्होंने पहली बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

सफलता का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने और बड़ी जीत हासिल करते हुए 303 सीटें जीतीं। इसके बाद 2024 के चुनाव में भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोग से उन्होंने 9 जून 2024 को लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। एक कार्यकर्ता का देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचना भारतीय राजनीति की बड़ी घटनाओं में गिना जाता है।

वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत उपस्थिति और सर्वोच्च नागरिक सम्मान
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने भारत की विदेश नीति को एक नया आयाम दिया। उन्होंने अमेरिका, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ब्रिटेन और यूएई समेत दुनिया के दर्जनों देशों की यात्राएं कीं। इन दौरों में द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा सौदों, आधुनिक तकनीक और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय से जुड़ने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया।

विदेशों में भारत का मान बढ़ाने के लिए उन्हें कई देशों के सर्वोच्च राजकीय सम्मानों से भी नवाजा गया है। विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2025 तक नामीबिया, ब्राजील, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, घाना, साइप्रस, श्रीलंका, मॉरीशस और बारबाडोस जैसे देशों ने उन्हें अपने शीर्ष नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया है। यह सम्मान केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि बदलते भारत की वैश्विक साख का प्रतीक माने जाते हैं।

दुनियाभर के देशों में बनी एक अलग और लोकप्रिय पहचान
नरेंद्र मोदी की पहचान अब सिर्फ भारत की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। विदेश यात्राओं के दौरान भारतीय प्रवासियों के बड़े-बड़े कार्यक्रमों में उनका संबोधन और दुनिया भर में उनका मजबूत ऑनलाइन नेटवर्क उनकी एक अलग पहचान बनाता है। सोशल मीडिया के प्रभावी इस्तेमाल ने उन्हें युवाओं और वैश्विक दर्शकों से सीधे जोड़ने का काम किया।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार मानते हैं कि किसी भी नेता की वैश्विक लोकप्रियता को नापने के अलग-अलग पैमाने और सर्वे होते हैं। लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक कूटनीति में भारत की बात को पूरी मजबूती और स्पष्टता के साथ रखा है, जिससे दुनिया भर में उनकी एक अलग छवि बनी है।

भाजपा का केंद्र से लेकर राज्यों तक रिकॉर्ड तोड़ विस्तार
नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा अध्याय भारतीय जनता पार्टी का चुनावी विस्तार माना जाता है। 2014 के आम चुनाव में पार्टी ने 282 सीटें जीतकर अपने बल पर केंद्र में सरकार बनाई, जो 2019 में बढ़कर 303 हो गई। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान पार्टी का जनाधार अभूतपूर्व रूप से बढ़ा।

इसके बाद देश के कई ऐसे राज्यों में भी भाजपा ने अपनी सरकारें बनाईं जहाँ कभी पार्टी का नामो-निशान बहुत कम था। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यों की जीत में स्थानीय नेताओं, गठबंधन और क्षेत्रीय सामाजिक समीकरणों का भी योगदान रहा, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी ही पार्टी के मुख्य चुनावी चेहरा बने रहे।

गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में भी लहराया पार्टी का परचम
भाजपा का राजनीतिक विस्तार केवल पारंपरिक हिंदी भाषी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, गोवा और कर्नाटक जैसे राज्यों में पार्टी ने अपने दम पर या सहयोगियों के साथ मिलकर सत्ता हासिल की। पूर्वोत्तर भारत में पार्टी की एंट्री को भारतीय राजनीति का एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव माना गया।

यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे सालों की मेहनत और संगठनात्मक ढांचा तैयार करना शामिल था। केंद्र में मजबूत सरकार होने का फायदा पार्टी को राज्य स्तर के चुनावों में भी मिला, जिससे भाजपा देश के कोने-कोने तक एक प्रमुख राजनीतिक दल के रूप में स्थापित हो सकी।

ऐसे ऐतिहासिक कानून जिन्होंने देश की सियासत बदल दी
मोदी सरकार के कार्यकाल को कई ऐसे बड़े और कड़े फैसलों के लिए याद किया जाता है, जिन्होंने देश की राजनीति को नई दिशा दी। इनमें 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को खत्म करना, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू करना, तीन तलाक पर कानून बनाना और नए भारतीय न्याय संहिता जैसे आपराधिक कानून शामिल हैं।

इन फैसलों पर लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर बहस चल रही थी। जहां समर्थकों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सुधार के लिए ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं विपक्ष और कई नागरिक समूहों ने इन पर अपनी अलग राय रखी। इसके बावजूद सरकार ने इन मुद्दों पर बिना पीछे हटे कड़े कानून बनाए और नीतियां लागू कीं।

कड़े फैसलों के साथ जुड़ा तीखा विरोध और नीतिगत बदलाव
नरेंद्र मोदी का कार्यकाल केवल जीतों और उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई बड़े निर्णयों पर देश भर में तीखा विरोध भी देखने को मिला। नोटबंदी, नागरिकता कानून, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन और कृषि कानूनों जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच लंबे समय तक गतिरोध बना रहा।

कृषि कानूनों का मुद्दा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई थी, लेकिन किसानों के लंबे और देशव्यापी आंदोलन के बाद नवंबर 2021 में संसद के जरिए इन्हें वापस (Farm Laws Repeal Act) ले लिया गया। इस घटना ने दिखाया कि सरकार कड़े फैसले लेने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार नीतिगत बदलाव करने से भी पीछे नहीं हटती।

लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनकर रचा इतिहास
2014 और 2019 में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बाद, 2024 के लोकसभा चुनाव में भी नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले गठबंधन ने जीत हासिल की। 9 जून 2024 को उन्होंने लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। भारतीय संसदीय इतिहास में लगातार तीन कार्यकाल पाना एक बहुत बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जाता है।

हालांकि, 2024 के चुनाव में भाजपा अपने दम पर 272 का जादुई आंकड़ा पार नहीं कर सकी, जिसके कारण केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार चल रही है। यह नया राजनीतिक समीकरण पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल को पहले के दो कार्यकालों से थोड़ा अलग और महत्वपूर्ण बनाता है।

वडनगर की गलियों से दिल्ली के सत्ता के गलियारे तक
17 सितंबर 1950 को वडनगर से शुरू हुई यह कहानी आज आजाद भारत की राजनीति के सबसे प्रमुख अध्यायों में से एक है। एक आम परिवार में जन्म, संघ के प्रचारक के तौर पर जमीनी संघर्ष, 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी और फिर लगातार तीन बार देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना..यह सफर दशकों की अटूट मेहनत का नतीजा है।

नरेंद्र मोदी के समर्थक उनके मजबूत नेतृत्व, राष्ट्रवाद और कड़े विकास कार्यों की तारीफ करते हैं, वहीं आलोचक उनकी कई नीतियों और काम करने के तरीके पर सवाल भी उठाते हैं। लेकिन इन तमाम मतभेदों से परे, यह सच है कि वडनगर से दिल्ली तक का उनका यह सफर भारतीय राजनीति का एक बेहद प्रभावशाली और ऐतिहासिक अध्याय बन चुका है।

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