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स्टेशन पर शराब तस्करों को पकड़ने के चक्कर में अपने में लड़ जा रहे हैं और GRP और RPF के जवान

विवाद इतना बढ़ गया कि जीआरपी कर्मियों की संख्या अधिक होने के कारण भगवान सिंह और ऋषि सिंह के बीच मारपीट की नौबत आ गई।
 

डीडीयू जंक्शन पर शराब तस्करी का खेल जारी

रविवार की रात जीआरपी व आरपीएफ के जवानों की भिड़ंत

आपस में भिड़ने की चर्चाएं जोरों पर

अधिकारी डाल रहे घटना पर पर्दा

चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रविवार की रात्रि को हुई एक घटना ने जीआरपी  और आरपीएफ के बीच खींचातानी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। बताया जा रहा है कि रेलवे स्टेशन पर शराब तस्करी को लेकर दोनों विभागों के अधिकारियों और कर्मियों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

सूत्रों के अनुसार, रविवार देर रात चर्चित शराब तस्कर सहित तीन अन्य तस्कर प्लेटफार्म संख्या दो पर पहुंचे। आरोप है कि वज्र टीम के प्रभारी ऋषि सिंह और उनके साथ मौजूद जीआरपी कर्मियों पर तस्करों को ट्रेन में सुरक्षित बैठाने की जिम्मेदारी उठाने का आरोप लगाया गया। इस दौरान जब तस्कर ट्रेन में चढ़ने ही वाले थे, तभी आरपीएफ के सीपीडीएस प्रभारी भगवान सिंह मौके पर पहुंच गए और उन्होंने तस्करों के बैग की तलाशी लेने की बात कही। इसी बात को लेकर दोनों अधिकारियों में विवाद छिड़ गया।

कहा जा रहा है कि विवाद इतना बढ़ गया कि जीआरपी कर्मियों की संख्या अधिक होने के कारण भगवान सिंह और ऋषि सिंह के बीच मारपीट की नौबत आ गई। घटना की भनक लगते ही उच्च अधिकारी सक्रिय हो गए और मामले को दबाने तथा शांत कराने में जुट गए। हालांकि इस पूरे प्रकरण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। आरपीएफ कमांडेंट से जब इस मामले पर फोन से संपर्क करने की कोशिश की गई तो कॉल रिसीव नहीं हुआ, वहीं जीआरपी थाना प्रभारी ने इस घटना की जानकारी से साफ इनकार कर दिया और खबर को अफवाह करार दिया।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था किस हद तक मजबूत है। यदि वास्तव में तस्करों को संरक्षण देने और पकड़ने के बीच खींचतान हुई है तो यह गंभीर मामला है। एक ओर जहां जीआरपी का दायित्व यात्रियों की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण है, वहीं आरपीएफ का कार्य रेलवे संपत्ति और ट्रेनों को सुरक्षित रखना है। ऐसे में दोनों विभागों के बीच टकराव सीधे तौर पर सुरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है।

फिलहाल उच्च अधिकारी मामले की जांच में जुटे हैं। अब देखना यह होगा कि इस विवाद पर पर्दा डाल दिया जाता है या फिर निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाई जाएगी। रेलवे जैसी महत्वपूर्ण सेवा में तैनात सुरक्षा बलों के बीच टकराव न केवल उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कहीं न कहीं सिस्टम में गंभीर खामियां मौजूद हैं। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में कोई बड़ी घटना घट सकती है।

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