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डीएम साहब,,कौन रोकेगा नाव वालों की मनमानी, जमकर वसूल रहे रहे हैं लोगों के पैसे

गौरतलब है कि 15 जून को गंगा में बाढ़ की संभावना को देखते हुए टाण्डाकला घाट पर पीपा का पांटून पुल हटा दिया गया था। इसके बाद जलस्तर बढ़ने के कारण नाव संचालन पर रोक लगा दी गई थी।
 

टाण्डा घाट पर सरकारी नाव संचालन बंद

ग्रामीणों का प्रदर्शन

प्राइवेट नाव वाले वसूल रहे मनमाना किराया

चंदौली जिले के गंगा नदी के टाण्डा घाट पर सरकारी नाव के संचालन बंद होने से नाराज ग्रामीणों ने सोमवार को जमकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर घटने के बावजूद प्रशासन द्वारा घाट पर सरकारी नाव सेवा शुरू नहीं की गई है, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने बताया कि टाण्डा घाट से प्रतिदिन सैकड़ों लोग मार्कण्डेय महादेव मंदिर दर्शन के लिए और वाराणसी व्यापार व नौकरी के सिलसिले में जाते हैं। पीपा पुल हटने और सरकारी नाव बंद होने के चलते लोग अब प्राइवेट नावों पर निर्भर हैं, जो मनमाना किराया वसूल रहे हैं।

गौरतलब है कि 15 जून को गंगा में बाढ़ की संभावना को देखते हुए टाण्डाकला घाट पर पीपा का पांटून पुल हटा दिया गया था। इसके बाद जलस्तर बढ़ने के कारण नाव संचालन पर रोक लगा दी गई थी। अब जबकि गंगा का जलस्तर काफी हद तक सामान्य हो चुका है और नगवा-चोचकपुर घाट पर सरकारी नावें चलने लगी हैं, वहीं टाण्डा घाट पर अब तक नाव संचालन शुरू नहीं किया गया है।

प्रदर्शन के दौरान सूरज यादव, संजय जायसवाल, त्रिलोकी साहू, अनिल निषाद, अरुण निषाद और गोलू पाण्डेय सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सरकारी नाव सेवा बहाल करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

स्थानीय लोगों ने कहा कि वैकल्पिक मार्ग लंबा और कठिन है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

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