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सकलडीहा में खनन माफियाओं के अवैध खनन ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत, ड्रेन को बना दिया गया तालाब

चंदौली के सकलडीहा में अवैध खनन माफियाओं ने ड्रेन को तालाब में बदल दिया है। जेसीबी से रात भर हो रही खुदाई से फसलों के बर्बाद होने और ग्रामीणों की सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है।

 
 

सकलडीहा में अवैध खनन का कहर

फसलों और ड्रेन के किनारों पर खतरा

रात के अंधेरे में जेसीबी से खुदाई

प्रशासन की लापरवाही पर भारी आक्रोश

किसानों ने आंदोलन की दी चेतावनी

चंदौली जिले के सकलडीहा थाना क्षेत्र में अवैध खनन का कारोबार इन दिनों जोरों पर है। विशेष रूप से अमावल और तेनुवट गांव के बीच स्थित ड्रेन में हो रही अंधाधुंध खुदाई ने न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि स्थानीय किसानों की आजीविका पर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। रिपोर्टर अश्विनी मिश्र के अनुसार, खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे रात के अंधेरे में बिना किसी डर के जेसीबी और अन्य भारी मशीनों का उपयोग कर ड्रेन से मिट्टी निकाल रहे हैं।

फसलों और ड्रेन के किनारों पर मंडरा रहा खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि ड्रेन की गहराई लगातार बढ़ाए जाने से इसके किनारों (बैंक) के कटान का खतरा कई गुना बढ़ गया है। यदि प्रशासन ने समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई, तो ड्रेन का किनारा कभी भी धंस सकता है। ऐसी स्थिति में आसपास के खेतों में पानी भरने और तैयार खड़ी फसलों के पूरी तरह बर्बाद होने की प्रबल आशंका है। किसानों के लिए यह उनकी मेहनत और कमाई का सीधा नुकसान है।

ग्रामीणों की सुरक्षा दांव पर
यह समस्या केवल जमीन और फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जान-माल के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है। जिस स्थान पर खुदाई हो रही है, वह रास्ता गांव के बच्चों और महिलाओं के आवागमन का मुख्य मार्ग है। गहरे गड्ढे होने के कारण किसी भी समय कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। रात में हो रही खुदाई से पैदा हुए गड्ढों का अंधेरे में अंदाजा लगाना नामुमकिन होता है, जो राहगीरों के लिए मौत का जाल बन चुके हैं।

प्रशासन की चुप्पी से आक्रोश
स्थानीय लोगों और किसानों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होने से खनन माफियाओं के हौसले और भी बढ़ गए हैं। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई और दोषी माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। यह मामला अब पूरे गांव के अस्तित्व और सुरक्षा से जुड़ गया है।

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