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सपा नेता जगमेंद्र यादव को कोर्ट से बड़ी राहत, लॉकडाउन उल्लंघन का 6 साल पुराना मुकदमा वापस

चंदौली की अदालत ने सपा नेता जगमेंद्र यादव सहित अन्य लोगों को बड़ी राहत देते हुए कोविड-19 लॉकडाउन उल्लंघन का पुराना मुकदमा वापस ले लिया है। उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर न्यायालय ने सभी विधिक कार्यवाहियों को समाप्त कर दिया है।

 
 

सपा नेता जगमेंद्र यादव हुए बरी

लॉकडाउन उल्लंघन का मुकदमा हुआ वापस

न्यायालय ने 30 मई को दिया आदेश

महामारी और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धाराएं खत्म

अभियुक्तों के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही समाप्त

चंदौली जिले में वैश्विक कोविड-19 महामारी के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन और सरकारी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के आरोप में फंसे समाजवादी पार्टी के नेता जगमेंद्र यादव सहित अन्य नामजद लोगों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। न्यायालय ने उन पर दर्ज पुराने मुकदमे को वापस लेने की आधिकारिक अनुमति दे दी है। यह महत्वपूर्ण और बड़ा न्यायिक आदेश 30 मई 2026 को अदालत द्वारा पारित किया गया है।

न्यायालय के इस नए फैसले के बाद पिछले कई वर्षों से कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे सपा नेता और उनके साथियों को बड़ी राहत मिल गई है। इसके साथ ही इस प्रकरण से जुड़े सभी नामजद लोगों के विरुद्ध चल रही न्यायिक कार्रवाई पर भी अब पूरी तरह से विराम लग गया है।

धीना और अलीनगर थाने में दर्ज था मुकदमा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोरोना काल के दौरान वर्ष 2020 में जनपद चंदौली के थाना धीना में अपराध संख्या 16/2020 के तहत एक आपराधिक मुकदमा पंजीकृत किया गया था। इस मामले से जुड़ा हुआ संबंधित प्रकरण बाद में थाना अलीनगर में भी दर्ज किया गया था।

इस मुकदमे में पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की गंभीर धाराएं 188, 269, 270, 271, 504 लगाई गई थीं। इसके साथ ही अभियुक्तों पर महामारी अधिनियम 1897 और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की विभिन्न धाराएं भी अधिरोपित की गई थीं। पुलिस का आरोप था कि इन अभियुक्तों ने सरकारी आदेशों की अवहेलना करते हुए कोविड-19 प्रोटोकॉल और लॉकडाउन के नियमों का सरेआम उल्लंघन किया था।

उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर लिया गया निर्णय
इस पूरे मामले में 'सरकार बनाम जगमेंद्र यादव आदि' के शीर्षक से संबंधित न्यायालय में लगातार विचारण (ट्रायल) चल रहा था। इसी बीच, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जनहित को ध्यान में रखते हुए पूर्व में जारी किए गए एक विशेष शासकीय आदेश के क्रम में ऐसे तमाम मुकदमों की विस्तृत समीक्षा की गई थी।

शासन के उसी नीतिगत निर्देश के अनुपालन में अभियोजन पक्ष द्वारा इस मुकदमे को वापस लेने के लिए एक औपचारिक प्रार्थना पत्र संबंधित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। सरकार की तरफ से आए इस कदम के बाद कोर्ट ने पत्रावली का गहनता से अध्ययन किया।

न्यायिक मजिस्ट्रेट ने विधिक कार्यवाही की समाप्त
माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट (जूनियर डिवीजन/फास्ट ट्रैक कोर्ट) ने पूरे प्रकरण का बारीकी से अवलोकन और विधिक परीक्षण करने के बाद, 30 मई 2026 को इस मुकदमे को पूरी तरह से वापस लेने की सहर्ष अनुमति प्रदान कर दी।

अदालत के इस आदेश के जारी होते ही सपा नेता जगमेंद्र यादव सहित इस केस में नामजद अन्य सभी अभियुक्तों के विरुद्ध चल रही सालों पुरानी न्यायिक कार्यवाही हमेशा के लिए समाप्त हो गई। न्यायालय के इस अंतिम आदेश के बाद संबंधित सभी अभियुक्तों को उक्त मुकदमे में आगे की किसी भी प्रकार की दंडात्मक या विधिक कार्रवाई से पूर्ण रूप से मुक्ति मिल गई है।

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