अफसरों से सवाल: क्या DM-BSA करेंगे EMU ट्रेन के भरोसे स्कूल चलाने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई?
चंदौली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की घोर लापरवाही सामने आई है। लगभग 50 शिक्षक EMU ट्रेन के समय अनुसार स्कूल आते-जाते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। शिक्षा विभाग के आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है।
चंदौली में सरकारी शिक्षकों की मनमानी
EMU ट्रेन के भरोसे चल रहे स्कूल
समय से पहले विद्यालय छोड़ने का मामला
शिक्षा सचिव के आदेशों की खुलेआम अनदेखी
डीएम और बीएसए से कठोर जांच की मांग
चंदौली जिले के मुगलसराय, सकलडीहा, धीना और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहाँ के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षक अपनी सुविधानुसार समय की धज्जियां उड़ा रहे हैं। खबर है कि लगभग 50 से अधिक शिक्षक EMU ट्रेन के परिचालन समय को ही अपने स्कूल आने-जाने का समय मान बैठे हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। वहां पर तैनात प्रधानाध्यापक भी ऐसे मनमाने शिक्षकों की हरकतों से परेशान हैं।

ट्रेन के समय पर स्कूल की निर्भरता
सरकारी नियमों के अनुसार, शिक्षकों को सुबह 7:30 बजे से पहले स्कूल पहुँचना अनिवार्य है और उन्हें दोपहर 1:30 बजे तक विद्यालय में रहना है। छात्रों के लिए स्कूल का समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक निर्धारित है। लेकिन, हकीकत यह है कि ये शिक्षक EMU ट्रेन के सहारे आते हैं, जिसके कारण वे अक्सर देरी से स्कूल पहुँचते हैं और दोपहर 12:00 से 12:30 बजे के बीच ही स्कूल छोड़कर स्टेशन की ओर भागते हैं ताकि वे वापस अपनी ट्रेन पकड़ सकें।
रेलवे स्टेशन के आसपास के सरकारी आदेशों की अनदेखी
यह लापरवाही सकलडीहा व बरहनी ब्लॉक के कई स्कूलों में अधिक दिख रही है। लोगों का कहना है कि कचमन, सकलडीहा, तुलसी आश्रम, धीना, बहोरा चंडील, तेनुवट, रैपूरा, बट्ठी, नरैना, नोनार, डैना और जलालपुर जैसे इलाकों के स्कूलों में ट्रेन से आने वाले टीचर देर से आते हैं और जल्दी जाते हैं। शिक्षकों की इस मनमानी के कारण शिक्षा सचिव के आदेश पूरी तरह से ठेंगे पर दिख रहे हैं। स्कूल के समय में ही शिक्षक गायब रहते हैं, जिससे बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा और मिड-डे मील जैसी व्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है।
कब इन स्कूलों की चेकिंग करेंगे बेसिक शिक्षा अधिकारी
सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) इन स्कूलों की जमीनी हकीकत से अनजान हैं? क्या कभी इन स्कूलों का औचक निरीक्षण किया गया है? अब समय आ गया है कि शिक्षा विभाग इस गंभीर मामले का संज्ञान ले और इन लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि सरकारी स्कूलों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
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