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ग्राम सभा की पोखरी को निजी जमीन बताकर बेचने का खेल, पूर्व प्रधान के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

चंदौली के खड़ान गांव में ग्राम सभा की पोखरी को निजी भूमि बताकर बेचने के खेल से हड़कंप मच गया है। पूर्व प्रधान पर लगे इस गंभीर आरोप के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। पूरी खबर पढ़ें।

 
 

धानापुर के खड़ान गांव में भारी आक्रोश

पूर्व प्रधान पर पोखरी बेचने का आरोप

गरीब लोगों को गुमराह करने का दावा

राजस्व विभाग से पैमाइश कराने की मांग

निष्पक्ष जांच न होने पर आंदोलन की चेतावनी

चंदौली जिले के धानापुर विकास क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां के खड़ान गांव में ग्राम सभा की पोखरी (सार्वजनिक तालाब) को निजी भूमि बताकर बेचने का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिलते ही पूरे गांव के नागरिकों में भारी आक्रोश और नाराजगी व्याप्त हो गई है।

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गांव के पूर्व प्रधान कमला सिंह द्वारा इस पूरी साजिश को अंजाम दिया जा रहा है। आरोप के मुताबिक, पूर्व प्रधान ग्राम सभा की इस बेशकीमती पोखरी को अपनी निजी पैतृक जमीन बता रहे हैं। इसके बाद वह बाहर से आने वाले भोले-भाले लोगों को गुमराह करके इस सार्वजनिक भूमि को बेचने का प्रयास कर रहे हैं।


 


गरीब और अनपढ़ लोगों को गुमराह करने का आरोप
इस पूरे भूमि विवाद को लेकर गांव के सजग नागरिकों ने प्रशासन के सामने अपनी आवाज बुलंद की है। मामले में लुला पासवान, दशमी पासवान, बहादुर पासवान और छोटे लाल गुप्ता समेत दर्जनों ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस धांधली की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की लिखित मांग की है।

ग्रामीणों का साफ कहना है कि संबंधित विवादित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में वर्षों से ग्राम सभा की पोखरी के रूप में ही दर्ज है। इस तालाब का उपयोग पूरा गांव वर्षों से सार्वजनिक और निज कार्यों के लिए करता आ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जानबूझकर गरीब, सीधे और अनपढ़ लोगों को गुमराह कर इस जमीन की अवैध खरीद-बिक्री का खेल खेला जा रहा है।

राजस्व विभाग से पैमाइश कराने की मांग
खड़ान गांव के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह ने भी इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से मांग करते हुए कहा कि राजस्व विभाग की टीम को तत्काल मौके पर भेजा जाए। इस भूमि की नए सिरे से सरकारी पैमाइश कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक जांच में सरकारी और सार्वजनिक भूमि की अवैध बिक्री की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि ग्राम सभा की जमीन और पोखरी जैसी सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा करना जिला प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है।

प्रशासन को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
फिलहाल, पोखरी की अवैध बिक्री की खबर के बाद से पूरे खड़ान गांव में केवल इसी बात की चर्चा हो रही है और लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि सरकारी संपत्ति को किसी भी कीमत पर भू-माफियाओं के हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।

ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर मामले में तत्काल निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई और अवैध खरीद-बिक्री को नहीं रोका गया, तो समस्त ग्रामवासी तहसील मुख्यालय पर जाकर उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

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