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धानापुर पॉलिटेक्निक: टेंडर के फेर में फंसा 7 करोड़ का 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस', बजट मिलने के बाद भी नहीं शुरू हुआ काम

धानापुर स्थित महामाया राजकीय पॉलिटेक्निक में ₹7 करोड़ की लागत से बनने वाला 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' टेंडर प्रक्रियाओं में उलझ गया है। ₹3.50 करोड़ जारी होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होने से छात्रों का तकनीकी प्रशिक्षण अधर में है।

 
 

7 करोड़ की लागत से बनेगा सेंटर

साढ़े तीन करोड़ का बजट जारी

जनवरी से टेंडर प्रक्रिया में देरी

टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड का मिलेगा सहयोग

डीएम ने जांच और त्वरित कार्रवाई को कहा

चंदौली जनपद के धानापुर स्थित महामाया राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में तकनीकी शिक्षा की सूरत बदलने के लिए शुरू किया गया 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का प्रोजेक्ट वर्तमान में टेंडर की प्रक्रियाओं में उलझ कर रह गया है। जहाँ पूर्वांचल के अन्य जनपदों में इस महत्वाकांक्षी योजना पर कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो चुका है, वहीं चंदौली में बजट आवंटित होने के महीनों बाद भी ईंट तक नहीं रखी जा सकी है।

7 करोड़ का प्रोजेक्ट और टेंडर की बाधा
इस सेंटर के निर्माण के लिए लगभग 7 करोड़ रुपये का कुल बजट स्वीकृत है, जिसमें से कार्यदायी संस्था को 3.50 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी भी कर दी गई है। इसके बावजूद, जनवरी माह से अब तक कई बार टेंडर की प्रक्रिया दोहराई जा चुकी है, लेकिन तकनीकी कारणों या आवेदनों की कमी के चलते यह अब तक अंतिम रूप नहीं ले पाई है। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार, इसी महीने एक बार फिर टेंडर की नई तिथि तय की गई है, जिससे कार्य शुरू होने की उम्मीद जगी है।

टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से निखरेगा छात्रों का कौशल
प्राविधिक शिक्षा विभाग और टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड (TTL) के सहयोग से प्रदेश के 45 संस्थानों में यह सेंटर स्थापित किया जा रहा है, जिसमें चंदौली भी शामिल है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें उद्योग की जरूरतों के हिसाब से तैयार करना है। सेंटर की स्थापना के बाद यहाँ विद्यार्थियों को एडवांस्ड सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर एंड मशीनरी, इनोवेटिव इकोसिस्टम और हैंडस ऑन एक्सपीरियंस जैसे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिए जाएंगे।

जिलाधिकारी ने दिए हैं जांच के आदेश
इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि महामाया राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में निर्माण कार्य शुरू होने में हो रही देरी की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि टेंडर की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पारदर्शी तरीके से पूर्ण कराया जाएगा, ताकि जनपद के छात्र-छात्राओं को आधुनिक लैब और वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग का लाभ मिल सके।

कॉलेज के प्राचार्य एके सिंह ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। वर्तमान में छात्र और अभिभावक इस प्रोजेक्ट के जल्द धरातल पर आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि जिले से तकनीकी रूप से सक्षम कार्यबल तैयार हो सके।

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