जिले का पहला ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टलMovie prime

गुरैनी में किसानों का धरना जारी: गंगा कटान रोकने के नाम पर सिर्फ मिट्टी वाली बोरियों का खेल जारी

चंदौली के गुरैनी में गंगा कटान की समस्या को लेकर किसानों का धरना जारी है। मिट्टी की बोरियों से हो रहे अस्थायी काम पर भड़के ग्रामीणों ने सरकार से बजट के आवंटन और कार्यों की गुणवत्ता को सार्वजनिक करने की मांग की है। पूरी खबर पढ़ें...

 
 

गुरैनी में किसानों का धरना जारी

अस्थायी कटानरोधी कार्यों पर नाराजगी

गंगा नदी में डाली जा रही बोरियां

बजट स्वीकृति की प्रक्रिया में अटकी योजना

सरकारी मानक सार्वजनिक करने की मांग

चंदौली जिले के धीना क्षेत्र अंतर्गत गुरैनी में गंगा नदी के भयंकर कटान को रोकने की मांग को लेकर किसानों का धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। सिंचाई विभाग के बंधी डिवीजन और लघु डाल विभाग द्वारा प्रभावित इलाकों में कराए जा रहे अस्थायी कटानरोधी उपायों से स्थानीय किसान बेहद नाराज और असहमत हैं। किसानों का साफ कहना है कि गंगा के रौद्र रूप और कटान जैसी अति गंभीर समस्या का परमानेंट इलाज महज खानापूर्ति वाले अस्थायी तरीकों से बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है।

guraini-farmers-protest-ganga-erosion-irrigation

 किसान नेता दीनानाथ श्रीवास्तव ने उठाए गंभीर सवाल
धरना स्थल पर किसानों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ किसान नेता दीनानाथ श्रीवास्तव ने कहा कि सिंचाई विभाग द्वारा गंगा की लहरों को थामने के लिए बलुई मिट्टी से भरी बोरियों को नदी में डाला जा रहा है। यह कवायद केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता साबित होगी, जो पानी के तेज बहाव में बह जाएगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों के उपजाऊ खेतों और गांवों के वजूद को बचाने के लिए जल्द से जल्द स्थायी कटानरोधी परियोजना की शुरुआत धरातल पर की जाए, ताकि अन्नदाताओं को भविष्य में अपनी जमीनों से हाथ न धोना पड़े।

guraini-farmers-protest-ganga-erosion-irrigation

 लघु डाल विभाग के अधिकारी ने दी सफाई
इस पूरे विरोध प्रदर्शन और हंगामे के बीच लघु डाल विभाग के एसडीओ सौरभ मालवीय ने विभाग का पक्ष रखते हुए बताया कि गंगा कटान की स्थायी रोकथाम के लिए एक बड़ी परियोजना तैयार की जा चुकी है, जिसका बजट वर्तमान में शासन स्तर पर स्वीकृति की प्रक्रिया में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही लखनऊ से बजट स्वीकृत होकर आ जाएगा, वैसे ही स्थायी निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। तब तक कटान की रफ्तार को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी व्यवस्था के तहत ही मिट्टी की बोरियां डालने का आपातकालीन कार्य किया जा रहा है।

विधायक और CDO के दौरे के बाद भी उलझा रहा मानकों और बजट का सच
उल्लेखनीय है कि गुरैनी के इस बेहद संवेदनशील मामले पर सैयदराजा विधानसभा सीट के भाजपा विधायक सुशील सिंह और उनके ठीक एक दिन बाद चंदौली के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) आर जगत साई ने भी प्रभावित क्षेत्रों का सघन दौरा किया था। दोनों ही बड़े जिम्मेदारों ने मौके पर मौजूद इंजीनियरों को गुणवत्ता के साथ काम करने की हिदायत दी थी। लेकिन, स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि किसी भी अधिकारी ने यह साफ नहीं किया कि आखिर इस कटान को रोकने के लिए सरकार ने किस लेवल का प्रोजेक्ट पास किया था और कितना धन इसके लिए आवंटित हुआ था।

अधिकारों की लड़ाई: जब तक स्थायी समाधान नहीं, तब तक खत्म नहीं होगा आंदोलन
स्थानीय लोग और किसान यह सच जानना चाहते हैं कि गंगा कटान को रोकने के लिए जो काम हो रहा है, उसका असली मानक क्या है और इससे लोगों को कितनी राहत मिलेगी। इस अनिश्चितकालीन धरने में मुख्य रूप से शिवराज सिंह, रविंद्र प्रताप सिंह, गुड्डू, धनंजय, प्यारे, जमुना, सुभाष और नागेंद्र सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय किसान पूरी ताकत के साथ डटे हुए हैं। किसानों ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक स्थायी समाधान की दिशा में ठोस जमीनी कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक उनका यह आंदोलन किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगा।

चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*