खुशबू किन्नर बम कांड: जेल से छूटते ही अभिषेक टिंकू बोले-थानाध्यक्ष और कारखास ने बनाया जबरन अपराधी
चंदौली के चर्चित खुशबू किन्नर बम विस्फोट कांड में नया मोड़ आ गया है। जेल से जमानत पर छूटे मुख्य आरोपी अभिषेक टिंकू ने तत्कालीन थानाध्यक्ष पर विपक्षी दल से मिलकर फर्जी फंसाने, मारपीट न करने के नाम पर वसूली और 'हाफ एनकाउंटर' की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
जमानत पर रिहा हुए अभिषेक सिंह टिंकू के तीखे तेवर
तत्कालीन थानाध्यक्ष अतुल प्रजापति पर साजिश का आरोप
पिटाई न करने और एनकाउंटर की धमकी देकर वसूली का दावा
जिलेटिन रॉड के नंबरों से जांच कराने की उठाई मांग
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की लगाई गुहार
चंदौली जिले के बलुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत चर्चित खुशबू किन्नर बम विस्फोट कांड में करीब तीन महीने बाद जेल से जमानत पर बाहर आए सराय गांव निवासी अभिषेक सिंह उर्फ टिंकू ने पुलिस और विपक्षी खेमे के बीच 'नापाक गठजोड़' का दावा कर खलबली मचा दी है। टिंकू का आरोप है कि उन्हें और उनके साथी विकास सिंह को एक सोची-समझी साजिश के तहत फर्जी मुकदमे में फंसाकर 'हाईटेक अपराधी' के रूप में पेश किया गया।
थानाध्यक्ष और कारखास पर वसूली का आरोप
अभिषेक टिंकू ने तत्कालीन थानाध्यक्ष अतुल प्रजापति पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरेंडर करने के बाद पुलिस कस्टडी में पिटाई न करने के एवज में मोटी रकम ली गई। यही नहीं, टिंकू ने दावा किया कि 'हाफ एनकाउंटर' (पैर में गोली मारने) की धमकी देकर उनके ससुर से भी पुलिस द्वारा भारी वसूली की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने पर तैनात एक 'कारखास' सिपाही के माध्यम से विपक्षी धीरेंद्र सिंह अंकित और खुशबू किन्नर के साथ मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया गया।
जिलेटिन रॉड और सीडीआर से खुलेगा राज
अभिषेक ने मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल से बरामद जिलेटिन रॉड पर अंकित नंबरों की जांच की जाए कि वह किसके नाम से आवंटित थी और कहाँ से आई। साथ ही तत्कालीन थानाध्यक्ष अतुल प्रजापति, संबंधित कारखास और विपक्षी पक्ष की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन की निष्पक्ष जांच हो। बलुआ थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जाए ताकि पुलिसिया बर्बरता और डीलिंग का सच सामने आ सके।
सुरक्षा की गुहार और न्याय की मांग
अभिषेक टिंकू ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मामले में रुचि लेने के बाद अब सच्चाई धीरे-धीरे सामने आ रही है। उन्होंने प्रशासन से अपनी और अपने परिवार की जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाते हुए कहा कि उन्हें अभी भी विपक्षियों और साजिशकर्ताओं से खतरा है। इस खुलासे के बाद जनपद की पुलिसिंग और तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। अब देखना होगा कि जिला पुलिस प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है।
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