चंदौली में पशुपालन विभाग का कमाल: विशेष सीमेन तकनीक से गाय ने एक साथ दिया दो बछियों को जन्म
चंदौली जिले में पशुपालन विभाग की 'सेक्स सॉर्टेड सीमेन' तकनीक वरदान साबित हो रही है। बरथरा खुर्द में एक गाय द्वारा दो बछियों को जन्म देने के बाद अब किसान नर पशुओं के झंझट से मुक्त होकर अपनी आय बढ़ाने की ओर अग्रसर हैं।
सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक का सफल परिणाम
मात्र 100 रुपये में गर्भाधान की सुविधा
बरथरा खुर्द में गाय ने दीं दो बछिया
सकलडीहा ब्लॉक में 75 बछियों का जन्म
पशुपालकों की आय बढ़ाने में तकनीक सहायक
चंदौली में पशुपालन विभाग की तकनीक का अनूठा प्रभाव, बरथरा खुर्द में गाय ने एक साथ दिया दो बछियों को जन्म
चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में पशुपालन विभाग द्वारा शुरू की गई 'सेक्स सॉर्टेड सीमेन' (विशेष सीमेन) योजना का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। इस तकनीक के माध्यम से पशुपालकों को न केवल अनचाहे नर पशुओं (बछड़ों) से मुक्ति मिल रही है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार के संकेत मिल रहे हैं। विभाग का दावा है कि इस तकनीक से गर्भाधान कराने पर शत-प्रतिशत फीमेल यानी बछिया या पड़िया पैदा होने की संभावना रहती है।
बरथरा खुर्द में दिखा तकनीक का चमत्कार
जिले के सकलडीहा ब्लॉक अंतर्गत बरथरा खुर्द गांव में इस तकनीक का एक सुखद परिणाम सामने आया है। यहाँ की निवासी चंदा देवी की गाय ने 'सेक्स सॉर्टेड सीमेन' के प्रभाव से एक साथ दो फीमेल बच्चों (बछिया) को जन्म दिया है। एक साथ दो बछियों के जन्म की खबर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीण और विभागीय कर्मचारी इसे तकनीक की एक बड़ी सफलता के रूप में देख रहे हैं।
मात्र ₹100 में पशुपालकों को बड़ी सौगात
पशुपालन विभाग द्वारा यह विशेष सुविधा पशुपालकों को मात्र 100 रुपये के नाममात्र शुल्क पर उपलब्ध कराई जा रही है। सकलडीहा ब्लॉक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक वर्ष में 203 गायों को इस तकनीक से गर्भाधान कराया गया था, जिनमें से अब तक 75 गायों ने बछिया को ही जन्म दिया है। पारंपरिक गर्भाधान की तुलना में यह सफलता दर काफी अधिक है।
डेयरी उद्योग और किसानों को होगा सीधा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा डेयरी किसानों को होगा। डेयरी व्यवसाय में फीमेल पशुओं की उपयोगिता अधिक होती है, क्योंकि वे भविष्य में दुग्ध उत्पादन का जरिया बनती हैं। इससे आवारा नर पशुओं की संख्या में भी कमी आएगी, जिससे किसानों की फसलें सुरक्षित रहेंगी और उनका प्रबंधन खर्च भी कम होगा।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हालांकि वैज्ञानिक प्रक्रिया की सफलता दर कई कारकों पर निर्भर करती है, लेकिन चंदौली में मिल रहे सकारात्मक रुझानों ने किसानों का भरोसा इस योजना के प्रति काफी मजबूत किया है।
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