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सकलडीहा बार एसोसिएशन विवाद का अंत: अशोक यादव अध्यक्ष घोषित, बार काउंसिल ने दी मान्यता

सकलडीहा बार एसोसिएशन के नेतृत्व को लेकर चल रहा संशय खत्म हो गया है। यूपी बार काउंसिल ने अशोक यादव की कार्यकारिणी को मान्यता देते हुए विरोधी पक्ष को अयोग्य करार दिया है। जानिए क्या है इस बड़े फैसले के पीछे के कानूनी कारण।

 
 

बार काउंसिल अध्यक्ष शिव किशोर गौड़ का बड़ा फैसला

अशोक कुमार यादव की कार्यकारिणी को मिली आधिकारिक मान्यता

अतुल तिवारी के पास वैध सीओपी न होना बना अयोग्यता का आधार

27 फरवरी 2026 को हुए चुनाव को माना गया वैध

महामंत्री रामराज यादव ने जिलाधिकारी को सौंपी आदेश की प्रति

चंदौली जनपद के सकलडीहा बार एसोसिएशन में पिछले कुछ समय से चल रहा नेतृत्व का विवाद अब सुलझ गया है। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए अपना स्पष्ट और अंतिम निर्णय सुना दिया है। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष शिव किशोर गौड़ ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि सकलडीहा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर अशोक कुमार यादव और उनके साथ चुनी गई पूरी कार्यकारिणी ही वैध है। इस आदेश के बाद तहसील परिसर और अधिवक्ता समाज में चल रही असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है।

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अशोक यादव के चुनाव को मिली संवैधानिक वैधता
जांच और तथ्यों के आधार पर बार काउंसिल ने यह पाया कि अशोक कुमार यादव का चुनाव 27 फरवरी 2026 को पूरी तरह से नियमों के अधीन संपन्न हुआ था। बार काउंसिल के दिशा-निर्देशों और 'मॉडल बायलॉज' का पालन करते हुए इस चुनाव प्रक्रिया को विधिवत माना गया है। काउंसिल ने स्पष्ट किया कि निर्वाचित पदाधिकारियों के पास अधिवक्ता संघ के संचालन का पूर्ण अधिकार है और उनका चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुआ था, जिसे अब आधिकारिक मान्यता भी मिल गई है।

सीओपी की कमी और अयोग्यता का कारण
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब बार काउंसिल ने दूसरे पक्ष के दावे को खारिज कर दिया। अध्यक्ष पद पर दावा ठोकने वाले अतुल कुमार तिवारी और उनकी पूरी कार्यकारिणी को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। आदेश के अनुसार, अतुल कुमार तिवारी के पास अनिवार्य सीओपी (Certificate of Practice) नहीं पाया गया। नियमों के मुताबिक, किसी भी बार एसोसिएशन के चुनाव में भाग लेने या पद धारण करने के लिए एक अधिवक्ता के पास वैध सीओपी होना अनिवार्य शर्त है। इसके अभाव में उनके नेतृत्व को असंवैधानिक करार दिया गया है।

डेमोक्रेटिक बार से जुड़ाव और अनुशासनात्मक संकेत
बार काउंसिल के आदेश में एक और गंभीर पहलू का उल्लेख किया गया है। अतुल तिवारी और उनके सहयोगियों पर डेमोक्रेटिक बार एसोसिएशन से संबंधित होने का आरोप है, जिसे काउंसिल ने नियमों के विरुद्ध माना है। आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि अयोग्य घोषित पक्ष द्वारा किया गया कोई भी प्रशासनिक या संगठनात्मक कार्य अनैतिक माना जाएगा। बार काउंसिल ने अधिवक्ता अनुशासन को सर्वोपरि रखते हुए यह सख्त रुख अपनाया है।

प्रशासनिक स्तर पर आदेश की क्रियान्विति
फैसला आने के तुरंत बाद सकलडीहा बार एसोसिएशन की मान्यता प्राप्त कार्यकारिणी सक्रिय हो गई है। महामंत्री रामराज यादव के नेतृत्व में अन्य पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन से संपर्क साधा। उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात कर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के मूल आदेश की प्रति सौंपी। कार्यकारिणी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस आदेश को तत्काल प्रभाव से तहसील स्तर पर लागू कराया जाए ताकि बार एसोसिएशन की गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकें।

अधिवक्ताओं में खुशी की लहर
इस निर्णय के बाद अशोक यादव के समर्थकों और सकलडीहा के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने संतोष व्यक्त किया है। जानकारों का मानना है कि बार काउंसिल के इस कड़े फैसले से न केवल सकलडीहा बल्कि पूरे जिले के बार एसोसिएशनों में नियमों के पालन का संदेश जाएगा। अब उम्मीद जताई जा रही है कि लंबे समय से बाधित कानूनी और संगठनात्मक कार्य बिना किसी गतिरोध के शुरू हो पाएंगे।

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