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सकलडीहा ग्राम पंचायत में फर्जी GST भुगतान का आरोप, 1.28 करोड़ का गबन को उजागर करने वाले को मिल रही धमकी

चंदौली जिले की सकलडीहा ग्राम पंचायत में फर्जी GST भुगतान का मामला सामने आया। शिकायतकर्ता अरविंद कुमार ने प्रधान-सचिव पर गबन का आरोप लगाते हुए जान से मारने की धमकी मिलने की शिकायत पुलिस अधीक्षक से की।

 
 

सकलडीहा ग्राम पंचायत फर्जी GST भुगतान

शिकायतकर्ता को मिली जान से मारने की धमकी

1.28 करोड़ रुपये गबन का आरोप

प्रधान-सचिव और फर्म संचालक पर केस

पुलिस अधीक्षक से सुरक्षा की मांग

चंदौली जनपद के सकलडीहा कस्बा निवासी अरविंद कुमार ने ग्राम पंचायत में फर्जी GST भुगतान का गंभीर आरोप लगाया है।  पीड़ित का आरोप है कि सकलडीहा ग्राम पंचायत में फर्जी GSTIN से 1.28 करोड़ का  गबन किया गया है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाते हुए कहा कि प्रधान, सचिव और फर्म संचालक द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। 

1.28 करोड़ रुपये का गबन
पीड़ित अरविंद कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत में कैंसिल्ड GSTIN (9FCYPP2400Q1ZO) से 1,27,85,559 रुपये का फर्जी भुगतान किया गया। इस संबंध में उन्होंने 13 जनवरी 2026 को जिलाधिकारी चंदौली और पंचायती राज निदेशालय, लखनऊ को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर जांच का आदेश भी दिया गया।

जांच बैठक में धमकी
26 फरवरी 2026 को पंचायत भवन में जांच बैठक के दौरान ग्राम प्रधान के पति राजेश सेठ ने शिकायतकर्ता को बाहर बुलाकर धमकी दी। अरविंद कुमार के अनुसार, उन्हें कहा गया—“लेटर डालना छोड़ दो, नहीं तो दुबारा यहां आने लायक नहीं बचोगे।” इसके बाद प्रधान, सचिव और फर्म संचालक ने उन्हें षड्यंत्र में फंसाने की साजिश भी रचनी शुरू कर दी।

शिकायतकर्ता ने जताई जान का खतरा
अरविंद कुमार ने बताया कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्हें लगातार महसूस हो रहा है कि उनकी जान को गंभीर खतरा है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि तत्काल FIR दर्ज कर उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। 

पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित ने कहा कि वह पहले से ही फर्जी भुगतान के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। अब प्रधान, सचिव और फर्म संचालक द्वारा उन्हें धमकाया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

इस तरह के मामले को देखकर लगता है कि पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार को उजागर करने वालों की खैर नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

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