सकलडीहा के माधोपुर में बेदखली के आदेश के बाद भी नहीं हटा अवैध कब्जा, जल निकासी बंद होने से किसानों में भारी रोष
चंदौली के सकलडीहा तहसील के माधोपुर गांव में तहसीलदार न्यायिक कोर्ट के बेदखली आदेश के बाद भी अवैध कब्जा नहीं हटा। पानी निकासी का रास्ता बंद होने से किसानों के खेतों में पानी भर रहा है और फसलों के नुकसान का खतरा है।
कोर्ट के बेदखली आदेश की अनदेखी
जल निकासी मार्ग पर अवैध कब्जा
खेतों में पानी भरने से फसलें खतरे में
अधिकारियों से बार-बार शिकायत के बाद भी चुप्पी
प्रशासन से तत्काल अतिक्रमण हटाने की मांग
चंदौली जिले की सकलडीहा तहसील क्षेत्र के माधोपुर गांव से प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। गांव में तहसीलदार न्यायिक न्यायालय द्वारा बेदखली का स्पष्ट आदेश जारी किए जाने के बाद भी कथित अवैध कब्जा नहीं हटाया जा सका है। कब्जा न हटने की वजह से किसानों के खेतों से पानी निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद पड़ा है।
पानी का रास्ता बंद, फसलों पर मंडराया खतरा
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गांव की शबरा पत्नी इद्रीश ने आराजी संख्या 452 पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। इस कब्जे के कारण सालों से चला आ रहा जल निकासी का मुख्य रास्ता रुक गया है। बारिश का पानी खेतों में जमा हो रहा है, जिससे धान समेत अन्य फसलों के गलने और बर्बाद होने की आशंका बढ़ गई है। किसान इस बात से बेहद चिंतित हैं।
शिकायतों के बाद भी नहीं हो रही कोई सुनवाई
पीड़ित किसानों का कहना है कि उन्होंने समस्या के समाधान के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायती पत्र दिए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न्यायालय से बेदखली का आदेश मिलने के बावजूद कार्रवाई न होना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो खेती करना असंभव हो जाएगा।
पूर्व प्रधान बोले: कोर्ट के आदेश का पालन जरूरी
माधोपुर के पूर्व प्रधान महेंद्र प्रताप तिवारी ने पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि तहसीलदार न्यायिक न्यायालय के आदेश का पालन कराने और अतिक्रमण हटवाने की कोशिशें जारी हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश पर अमल कराना पूरी तरह प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि किसानों को राहत मिल सके और जल निकासी की व्यवस्था फिर से चालू हो पाए।
अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं निगाहें
माधोपुर गांव के परेशान किसानों ने एक सुर में प्रशासन से गुहार लगाई है कि कोर्ट के फैसले को जल्द से जल्द लागू किया जाए। अवैध कब्जा हटाकर पानी निकलने का रास्ता साफ कराया जाए ताकि फसलें तबाही से बच सकें। फिलहाल, कार्रवाई के इंतजार में पूरे गांव के किसानों की नजरें तहसील प्रशासन के रुख पर बनी हुई हैं।
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