सकलडीहा तहसील में ऑनलाइन कामकाज ठप: 100 लेखपालों का प्रदर्शन, 441 गांवों के ग्रामीण परेशान
चंदौली के सकलडीहा तहसील में करीब 100 लेखपालों ने 8 अक्टूबर से ऑनलाइन काम बंद कर दिया है। समाधान दिवस पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया गया। मांगें न पूरी होने पर 17 अक्टूबर से पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया गया है।
सकलडीहा तहसील में लेखपालों का विरोध प्रदर्शन
8 अक्टूबर से ऑनलाइन काम ठप पड़ा
आय जाति निवास प्रमाण पत्र के आवेदन अटके
लेखपालों ने दी पूर्ण हड़ताल की चेतावनी
चंदौली जिले की सकलडीहा तहसील में लेखपालों का विरोध प्रदर्शन लगातार गहराता जा रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आठ अक्टूबर से करीब 100 लेखपालों ने ऑनलाइन कामकाज पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसके चलते आम जनता और छात्रों के जरूरी काम पूरी तरह अटक गए हैं।
हजारों आवेदन पड़े लंबित, 441 गांवों पर सीधा असर
तहसील कामकाज बंद होने से आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र और वरासत से जुड़े हजारों आवेदन तहसील स्तर पर लंबित पड़े हैं। सकलडीहा तहसील के अंतर्गत आने वाले 441 गांवों के ग्रामीणों और युवाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रमाण पत्र न बन पाने से जरूरी सरकारी और शैक्षणिक काम रुके हुए हैं।
समाधान दिवस में काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
शनिवार को सकलडीहा कोतवाली परिसर में समाधान दिवस का आयोजन किया गया था। इसमें एसडीएम आकांक्षा सिंह और सीओ कृष्णमुरारी शर्मा जनता की समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद लेखपालों ने अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। गौरतलब है कि लेखपाल 22 सितंबर से ही अतिरिक्त गांवों का काम छोड़ चुके थे।
ग्रेड पे, ट्रांसफर और भत्ते बढ़ाने की मुख्य मांग
लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष विनय सिंह और तहसील अध्यक्ष अरुण अवस्थी के नेतृत्व में यह आंदोलन चलाया जा रहा है। लेखपालों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगों में ट्रांसफर व्यवस्था में सुधार, ग्रेड पे में वृद्धि और भत्तों में बढ़ोतरी शामिल है। उन्होंने बताया कि कुछ भत्तों में साल 1962 के बाद से कोई बदलाव नहीं किया गया है।
17 अक्टूबर से पूर्ण हड़ताल की दी गई चेतावनी
लेखपाल संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो वे 17 अक्टूबर से पूरी तरह काम बंद कर पूर्ण हड़ताल पर चले जाएंगे। यदि ऐसा होता है तो राजस्व संबंधी बाकी काम भी पूरी तरह ठप हो सकते हैं, जिससे आम लोगों की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।
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