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सकलडीहा विधानसभा के इन गांवों की जनता का ऐसा है चुनावी मूड, जानिए सबके मन की बात
चंदौली जिले के सकलडीहा विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के कई दावेदार मैदान में उतरने के लिए जोर लगा रहे हैं।
 

सकलडीहा में गांव के मतदाता

सुख दुख के भागीदार को बनाना चाहते हैं अपना विधायक

कुछ ऐसा कह रहे हैं मतदाता 

 

चंदौली जिले के सकलडीहा विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के कई दावेदार मैदान में उतरने के लिए जोर लगा रहे हैं। आखिर कौन सबसे तगड़ा दावेदार होगा इसको लेकर सकलडीहा विधानसभा के लोगों ने अलग अलग तरह से प्रतिक्रिया दी है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी से टिकट मांग रहे कई दावेदार अपने आप को संभावित प्रत्याशी के रूप में घोषित कर चुके हैं। उनका दावा है कि टिकट उन्हें ही मिलेगा और वह सपा से सीट छीनने में सफल हो जाएंगे। लेकिन उनके दावे के बारे में सकलडीहा विधानसभा के कई गांवों की जनता बात करके सच्चाई जानने की कोशिश की गयी। 

आपको बता दें कि सकलडीहा विधानसभा से भाजपा के टिकट के कई दावेदार हैं। सूर्यमुनी तिवारी, डॉक्टर कृष्णा नन्द पांडेय, अरविंद पांडेय, कैलाश विवेक यादव, आरपी कुशवाहा जैसे लोग अपने आपको तगड़ा कंडीडेट बताकर अपने पक्ष में चुनावी माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना है कि भाजपा इन्हीं में से किसी को उम्मीदवार बनाती है या समीकरण साधने व भाजपा की झोली में अबकी बार यह सीट डालने के लिए किसी और उम्मीदवार पर दाव लगाते हैं।

आइए आपको बताते हैं कि जनता कैसा उम्मीदवार चाहती है और सकलडीहा विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी का टिकट किसे मिलना चाहिए और क्यों... ? 

विधानसभा के सेवखर, बढ़वलडीह, ताजपुर, दुर्गापुर, भोजापुर, घरचित, इटावा सहित तमाम गांव के लोगों से बात करने पर पता चला कि लोग केवल उस दावेदार को उम्मीदवार बनाते हुए टिकट देने की पैरवी कर रहे हैं, जिसने विधानसभा के लोगों को सर्वाधिक समय दिया हो और सुबह शाम जनता के सुख दुख में खड़ा रहा हो। केवल चुनावी सीजन में टिकट मांगने वाले और किसी नेता व मंत्री के खासमखास बनकर अपनी दावेदारी को मजबूत करने वालों को नकार देना चाहिए। जो जीतने के पहले जनता के बीच रहा हो, वही व्यक्ति विधायक बनने के बाद भी लोगों के दुख और सुख में साथ देगा।

अधिकांश लोगों का कहना है कि कई दावेदार आए हैं और सबको अपनी हकीकत मालूम है, लेकिन 5 वर्षों तक मेहनत करने वाला दावेदार अधिक मजबूत नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव हारने के बाद भी अपना पूरा समय जनता के बीच देने वाले को एक मौका और देना चाहिए। वैसे देखा जाय तो टिकट का असली दावेदार तो वही है और उसे ही टिकट मिलना चाहिए। कई लोगों ने सीधे तौर पर सूर्यमुनि तिवारी का नाम तो नहीं लिया लेकिन संकेत शायद उन्हीं की ओर है। 

वही नटराज इलेक्ट्रॉनिक के प्रोपराइटर कृष्णा सोनी का कहना है कि किसी स्थानीय व्यापारी नेता को टिकट देकर व्यापारियों का नुमाइंदा चुनना चाहिए, जो हमारे बीच का हो और हमारे हित की बात कर सके।  

दिव्या डायग्नोस्टिक सेंटर के प्रोपराइटर डॉ मुकुंद सिंह ने कहा कि जिस ने जनता के बीच अपना समय दिया हो टिकट का असली हकदार वही है। वहीं पेशे से अधिवक्ता मुरलीधर पांडेय ने कहा कि ज्यादातर लोगों ने तो केवल अपना भौकाल बनाने व पैसे व संबंध की हनक दिखाने के लिए टिकट की दावेदारी में नाम डाल लिया है। हम लोग अपने बीच में 5 साल सेवा करने वाले व्यक्ति को ही उम्मीदवार के रूप मे देखना चाहते हैं।

सकलडीहा बाजार व इसके आसपास के लोगों ने कहा कि बहुत से लोगों ने कहा कि यह सीट जीतने के लिए भाजपा को पूर्व विधायक सुशील सिंह जी को टिकट दे देना चाहिए क्योंकि यही भाजपा का एकमात्र नेता है जो मौजूदा माहौल में सपा को टक्कर देकर गारंटी के साथ सीट जीत सकता है। हालांकि सुशील सिंह अपनी प्राथमिकता सैयदराजा विधानसभा बता रहे हैं और वहीं से चुनाव लड़ना चाहते हैं। 

जिला पंचायत सदस्य संजय पांडेय ने कहा कि वह स्वयं ही भारतीय जनता पार्टी की टिकट के दावेदार हैं। यहां के स्थानीय निवासी होने के नाते उनकी दावेदारी पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि वह सभी वर्गों के साथ अपनी बिरादरी का सर्वाधिक वोट बटोर सकते हैं।  

एक समर्थक ने कहा कि डॉक्टर कृष्णा नन्द पांडेय व अरविंद पांडेय इलाके में जोर लगा रहे हैं और पिछले एक साल से अधिक मेहनत करते देखे गए हैं। अगर ये लोग मजबूती से चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो अगले 5 साल तक इनको जनता के बीच रहकर ऐसा काम करना चाहिए कि अगली बार उनके मुकाबले कोई और न टिक सके। लेकिन अबकी बार टिकट का असली हक तो उसी दावेदार का है, जो हारने के बाद भी पांच सालों तक हिम्मत नहीं हारा है।

वहीं विवेक कैलाश यादव की दावेदारी पर लोगों ने कहा कि वह पिछड़ा वर्ग के मजबूत दावेदार हो सकते हैं, लेकिन पार्टी उनको कितना मजबूत मानती है..यह देखने वाली बात होगी। हो सकता है जातिगत आंकड़े व समीकरण को देखकर उनको टिकट मिल जाए, लेकिन वह कितनी मजबूती से चुनाव लड़ेंगे यह देखने वाली बात होगी।