मतदाता सूची से कटे 25 हजार नाम, जोड़ने के लिए साक्ष्य लेकर तहसील पहुँच रहे हैं लोग
सकलडीहा विधानसभा में 'नो मैपिंग' के तहत मतदाता सूची से हटाए गए 25,201 लोगों को तहसील प्रशासन ने नोटिस भेजा है। मतदाताओं को 27 फरवरी तक पहचान पत्र के साथ उपस्थित होकर साक्ष्य देने होंगे, तभी उनका नाम सूची में बहाल होगा।
सकलडीहा विधानसभा में 25,201 नाम कटे
तहसील में साक्ष्य प्रस्तुत कर रहे मतदाता
13 प्रकार के पहचान पत्रों की मान्यता
एसडीएम की देखरेख में चल रहा सत्यापन
2 मार्च को अंतिम सूची का प्रकाशन
चंदौली जनपद के सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के बाद एक बड़ा उलटफेर सामने आया है। 'नो मैपिंग' यानी पहचान संबंधी पर्याप्त दस्तावेज न होने के कारण कुल 25,201 मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं। अब अपने मताधिकार को सुरक्षित करने के लिए सैकड़ों लोग प्रतिदिन सकलडीहा तहसील पहुँच रहे हैं।

क्या है 'नो मैपिंग' का मामला?
सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र की हालिया प्रकाशित मतदाता सूची में कुल 2,08,955 मतदाताओं के नाम दर्ज थे। विस्तृत जांच और पुनरीक्षण के दौरान प्रशासन ने पाया कि 25,201 मतदाता ऐसे हैं जिनके पहचान संबंधी साक्ष्य (साक्ष्य) रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं। इसी के चलते इन नामों को 'नो मैपिंग' श्रेणी में डालते हुए सूची से विलोपित कर दिया गया था। अब तहसील प्रशासन इन सभी प्रभावित मतदाताओं को व्यक्तिगत नोटिस भेजकर उन्हें अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका दे रहा है।

तहसील में सत्यापन की विशेष व्यवस्था
एसडीएम कुंदन राज कपूर के निर्देश पर तहसील की दूसरी मंजिल पर स्थित एक बड़े हॉल को सत्यापन केंद्र के रूप में तब्दील कर दिया गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में मतदाता अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य पहचान पत्रों के साथ यहाँ पहुँचे। नियमानुसार, मतदाताओं को निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 13 प्रकार के पहचान पत्रों में से कोई भी एक साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद एक फॉर्म भरकर एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है, जहाँ मतदाताओं की फोटो भी ली जा रही है।
27 फरवरी तक का अंतिम अवसर
सकलडीहा एसडीएम कुंदन राज कपूर ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों को नोटिस मिला है, उन्हें निर्धारित तिथि पर तहसीलदार संदीप श्रीवास्तव या नायब तहसीलदार दिनेश चंद्र शुक्ला के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति 27 फरवरी तक अपने साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसका नाम मतदाता सूची से स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा।
अंतिम सूची का प्रकाशन और प्रशासनिक मुस्तैदी
इस महत्वपूर्ण अभियान के बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 2 मार्च को किया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी वास्तविक मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे और फर्जी नामों को हटाया जा सके। इस दौरान बीएलओ (BLO) और तहसील के अन्य कर्मचारी मुस्तैदी से कार्यों के निस्तारण में जुटे हुए हैं। मतदाताओं से अपील की गई है कि वे समय रहते अपने दस्तावेजों का सत्यापन करा लें।
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