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कोरोना काल में गरीबों की मदद करने वाली श्लोका देवी का निधन, गांव में शोक की लहर
चंदौली जिले के धीना थाना क्षेत्र के सबल जलालपुर निवासी श्लोका देवी (96 वर्षीया) का शनिवार को 3 बजे भोर में ईलाज के दौरान एपेक्स हास्पिटल वाराणसी में निधन हो गया।
 

श्लोका देवी का निधन

गांव में शोक की लहर

कोरोना काल करती थी गरीबों की मदद 

चंदौली जिले के धीना थाना क्षेत्र के सबल जलालपुर निवासी श्लोका देवी (96 वर्षीया) का शनिवार को 3 बजे भोर में ईलाज के दौरान एपेक्स हास्पिटल वाराणसी में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वहां पर बीमार होने की वजह से उनका इलाज चल रहा था। मौके पर परिवार के सभी सदस्य मौजूद रहे।

परिवार के लोगों ने बताया कि श्लोका देवी नित्य की भांति घर और मंदिर में पूजा पाठ कर आराम कर रही थीं, कि अचानक ब्रेन हेमरेज हो गया। मौके पर मौजूद दाई तथा खेती का काम देखने वाले मजदूर ने तत्काल उनके तीनों पुत्रों व बेटियों को सूचित करते हुए तत्काल वाराणसी के एपेक्स हास्पिटल में इलाज के लिए पहुंचे। मौके पर परिवार के सभी सदस्य उपस्थित होकर इलाज कराना प्रारंभ कराया, लेकिन उनको बचाया न जा सका।

श्लोका देवी के पति स्वर्गीय श्यामनारायण सिंह की मृत्यु सन 2016 में ही हो गई थी। घर पर अकेले रहकर खेती बारी का काम स्वयं देखती थीं। धार्मिक प्रवृत्ति, दयालुता तथा ईमानदारी इनकी पहचान थीं। कोरोना काल में पिछले वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री राहत कोष में 51,000  का रूपये दान, अयोध्या मंदिर निर्माण में 11,000 रूपये दान, घर पर पंचमुखी हनुमान मंदिर का निर्माण तथा कोरोनाकाल में गांव एवं आसपास के लोगों को बुलाकर प्रतिदिन चावल, दाल, आटा और सब्जी बांटा करती थीं। 

इनके बड़ा पुत्र सुरेंद्र सिंह दरोगा पद से अवकाश प्राप्त, दूसरा पुत्र जोगिंदर सिंह स्वास्थ्य विभाग में तथा तीसरा पुत्र नरेन्द्र प्रताप सिंह रेनूकूट हिन्डाल्को में अधिकारी पद पर कार्यरत हैं। मां की नक्शेकदम पर चलते हुए नरेंद्र प्रताप सिंह भी दयालु एवं दानी स्वभाव के हैं। किसी के जीवन के लिए ब्लडदान करना इनका स्वभाव है। स्वर्गीय श्लोका देवी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़कर गई हैं। श्लोका देवी का अन्तिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर हुआ। मुखाग्नि छोटे पुत्र नरेन्द्र प्रताप सिंह ने दी।