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सड़क निर्माण न होने से भड़के ग्रामीण, बोले– रोड नहीं तो वोट नहीं

हसनपुर प्राथमिक विद्यालय से तीरगांवा बॉर्डर तक लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क बनाई गई है। लेकिन इसके आगे का हिस्सा आज भी ईंट के टूटे-फूटे मार्ग का चकरोड है।
 

हसनपुर–महमदपुर मार्ग पर सड़क निर्माण की मांग तेज

3 किमी की दूरी के लिए ग्रामीण कर रहे 7 किमी का चक्कर

सांसद ने चुनाव के समय किया था सड़क निर्माण का वादा

चंदौली जिले के चहनियां में हसनपुर तीरगांवा से महमदपुर जाने वाले मार्ग के निर्माण न होने से नाराज ग्रामीणों ने रविवार को विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि गाजीपुर जाने के लिए उन्हें तीन किमी की बजाय सात किमी घूमकर जाना पड़ता है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने कोई कदम नहीं उठाया।

आपको बता दें कि महमदपुर जमालपुर की आबादी लगभग छह हजार है। यहां के लोग आज भी क्षतिग्रस्त ईंट के रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हसनपुर से महमदपुर तक मात्र तीन किमी की दूरी है, लेकिन सड़क जर्जर होने के कारण उन्हें सात किमी लंबा चक्कर लगाना पड़ता है।

बताते चलें कि हसनपुर प्राथमिक विद्यालय से तीरगांवा बॉर्डर तक लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क बनाई गई है। लेकिन इसके आगे का हिस्सा आज भी ईंट के टूटे-फूटे मार्ग का चकरोड है। इस मार्ग से गुजरकर तीरगांवा, महमदपुर, सरौली, टांडा और सोनबरसा समेत कई गांवों तक पहुंचा जाता है। खराब सड़क की वजह से न केवल ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है, बल्कि मरीजों और स्कूली बच्चों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रस्ताव देकर और जनप्रतिनिधियों से मिलकर सड़क निर्माण की मांग उठाई। यहां तक कि सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त ने लोकसभा चुनाव के दौरान वादा किया था कि वे जीतने के बाद सड़क का निर्माण कराएंगे। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वादा पूरा नहीं हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि अब वे आंदोलन तेज करेंगे। उनका साफ कहना है कि “इस बार रोड नहीं तो वोट नहीं।” उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं होता, तब तक वे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का विरोध जारी रखेंगे।

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