डिघवट में ड्रेन की बदहाली से 1000 हेक्टेयर धान की फसल बर्बाद, किसानों का फूटा गुस्सा- 'मुआवजा नहीं तो वोट नहीं'
जलजमाव से 1000 हेक्टेयर फसल बर्बाद
ड्रेन सफाई में कागजी खानापूर्ति का आरोप
किसानों ने दी वोट बहिष्कार की चेतावनी
सकलडीहा के डिघवट गांव में प्रदर्शन
प्रशासन से तत्काल क्षतिपूर्ति सर्वे की मांग
चंदौली जिले के सकलडीहा क्षेत्र अंतर्गत डिघवट गांव में सिंचाई विभाग और प्रशासन की लापरवाही का बड़ा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। गांव में मौजूद ड्रेन की सही तरीके से सफाई न होने के चलते बारिश और बाढ़ का पानी खेतों में जमा हो गया। पानी की निकासी का कोई रास्ता न मिलने से देखते ही देखते लगभग 1000 हेक्टेयर से अधिक रकबे में लगी धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई।
सफाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति का आरोप
तबाही से आक्रोशित किसानों ने मौके पर एकजुट होकर प्रशासन और सिंचाई विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। किसानों का सीधा आरोप है कि क्षेत्रीय ठेकेदार द्वारा ड्रेन की सफाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई है। धरातल पर मानक के अनुसार काम ही नहीं हुआ, जिससे ड्रेन का पानी निकलने का रास्ता बंद रहा और बारिश का पानी सीधे किसानों के लहलहाते खेतों में समा गया।
अब तक नहीं पहुंचा कोई अफसर
ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव के चलते डिघवट और आसपास के कई पड़ोसी गांवों में किसानों की पूरे साल की मेहनत पर पानी फिर चुका है। इसके बावजूद अभी तक न तो कोई क्षेत्रीय लेखपाल और न ही सिंचाई विभाग या तहसील का कोई प्रशासनिक अधिकारी नुकसान का जायजा लेने पहुंचा है। अधिकारियों की इस अनदेखी से किसानों के भीतर नाराजगी और ज्यादा बढ़ती जा रही है।
'उचित मुआवजा दो वरना करेंगे चुनाव का बहिष्कार'
किसान नेता विकास सिंह और किसान यूनियन मजदूर के जिलाध्यक्ष पारस विश्वकर्मा ने कहा कि यदि समय रहते ड्रेन की सफाई हुई होती तो यह नौबत न आती। किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि तत्काल विभागीय टीमों को भेजकर फसल क्षति का सर्वे कराया जाए और पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द मुआवजा नहीं मिला तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे और आगामी चुनाव में पूरी तरह वोट का बहिष्कार करेंगे।
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