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पुश्तैनी जमीन को पट्टीदार कर रहे थे कब्जा, पुलिस व प्रशासन नहीं कर रहा था मदद,
लेकिन समुचित कार्रवाई ना होने पर अनीता देवी ने सोमवार को चंदौली पुलिस लाइन पहुंचकर आत्मदाह का प्रयास किया। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों द्वारा अनीता देवी को आत्महत्या करने से बचा लिया गया।
 

जान देने की कोशिश करते ही जाग गयी पुलिस

मौके पर पहुंचे CO व कोतवाल

मौके पर हटवा दिया कब्जा

जानिए इसलिए आयी जान देने की नौबत

 


चंदौली जिला के चकिया कोतवाली क्षेत्र के सैदूपुर कस्बा निवासिनी अनीता देवी पत्नी लल्लन मौर्या का पट्टीदारों के बीच भूमि विवाद को लेकर पिछले 8 माह से विवाद चल रहा है, जिसमें पाट्टीदारों द्वारा महिला अनीता देवी सहित परिवार के लोगों के साथ मारपीट भी हुई थी। लेकिन पुलिस मामले को हल कराने के बजाय टालमटोल करके कब्जेदारों के पक्ष में पैरवी कर रही थी।

Anita Suicide Attempt

 

बता दें कि मामला पिछले महीनों उप जिलाधिकारी तथा कोतवाली पुलिस तक पहुंचा था, लेकिन समुचित कार्रवाई ना होने पर अनीता देवी ने सोमवार को चंदौली पुलिस लाइन पहुंचकर आत्मदाह का प्रयास किया। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों द्वारा अनीता देवी को आत्महत्या करने से बचा लिया गया।

अनीता देवी के आत्मदाह के प्रयास का मामला पुलिस अधीक्षक तक पहुंचने के बाद उन्होंने चकिया के पुलिस क्षेत्राधिकारी रघुराज को जांच हेतु सौंपा। जिस पर सीओ रघुराज तथा कोतवाल राजेश यादव पुलिस फोर्स के साथ मौके पर आए और विवादित भूमि का निरीक्षण किया। जहां विवादित भूमि में विपक्षी हीरालाल मौर्य द्वारा बांधी गई गाय को तत्काल मौके से हटवा दिया गया।

 मौके पर मौजूद अनीता देवी के पति लल्लन मौर्य ने बताया कि परिवार की पुश्तैनी 5 बिस्वा जमीन में पांच भाइयों राम अधार, श्यामलाल  जगनारायन, श्रीराम, लल्लन को बटवारा में हिस्सा मिला था। जिसमें दो भाई जगनारायन, श्रीराम वर्ष 1980 में अपने हिस्से की एक एक बिस्वा भूमि बेच दी थी। लल्लन मौर्य का आरोप है कि 1980 में बसंती देवी के नाम बेची गई भूमि को वर्ष 2014 में खारिज दाखिल कराने के समय उनके पट्टीदार जगनारायन के बड़े पुत्र रामप्रवेश द्वारा खारिज दाखिल कराने में गड़बड़ी कराई गई और दो बिस्वा की जगह ढाई बिस्वा जमीन का खारिज दाखिल करा दिया गया। 

वर्षों से जिस भूमि में वह काबिज थे, उस भूमि में रामप्रवेश ने 8 माह पूर्व पुनः दूसरे पट्टीदार हीरालाल को जमीन बेच दी। जबकि उनका परिवार अपनी भूमि में पिछले चार दशक से काबिज रहा है। उसके बाद रामप्रवेश तथा हीरालाल द्वारा कई बार उनके तथा उनके पत्नी बच्चों के साथ मारपीट कर जमीन खाली कराने का दबाव बनाया गया। जिस पर उप जिलाधिकारी कार्यालय तथा चकिया कोतवाली में पत्नी अनीता देवी द्वारा न्याय की गुहार भी लगाई गई। लेकिन उसमें कोई न्याय संगत कार्रवाई नहीं की गई। उनकी भूमि में हीरालाल द्वारा जबरदस्ती गाय बांधकर गोबर रखकर कब्जा किया गया है। 

बार-बार फरियाद के बाद भी न्याय ना मिलने की उम्मीद के बाद उनकी पत्नी अनीता देवी ने चंदौली पुलिस लाइन जाकर जान देने की कोशिश की है।

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