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आयुष्मान योजना के कार्डधारी मरीज जिला अस्पताल से जबरन खींच ले जाते हैं प्राइवेट हॉस्पिटल के दलाल, जानिए ताजा मामला
पंडित कमलापति त्रिपाठी जिला हॉस्पिटल में शनिवार के दिन जितेंद्र कुमार (22 वर्षीय) चिरईगांव निवासी भर्ती किया गया था, जिसका आयुष्मान कार्ड के अंतर्गत जिला अस्पताल में  इलाज प्रारंभ कर दिया गया।
 

दलालों के आगे बेबस नजर आ रहे हैं आयुष्मान मित्र

जिला अस्पताल में बेधड़क घूमते हैं एजेंट

कई उच्चाधिकारियों से है सेटिंग

नहीं होती है इन पर कार्रवाई

चंदौली जिले के जिला अस्पताल में लगातार दलालों का रैकेट इस कदर अस्पताल में भ्रमण कर रहे हैं कि गरीब बेसहारा लोगों को अब आयुष्मान कार्ड के नाम पर अपने हास्पिटल में ले जाने के लिए सारे पैंतरे लगाए जा रहे हैं। दलालों एवं प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टरों के एक रैकेट का जिला अस्पताल में इस कदर दखलंदाजी बढ़ गई है कि खुद को पढ़ा-लिखा व डिग्री धारक डॉक्टर बताकर जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को अपने हॉस्पिटल में भर्ती कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। जिनके आगे जिला अस्पताल प्रशासन व सरकारी तंत्र भी लाचार हो गया है। जिला अस्पताल में भर्ती मरीज दलाल बिना डिस्चार्ज स्लिप के निकालकर ले जाते हैं और अस्पताल प्रशासन कुछ नहीं कर पाता है।

 बता दें कि चंदौली जिले के पंडित कमलापति त्रिपाठी जिला हॉस्पिटल में शनिवार के दिन जितेंद्र कुमार (22 वर्षीय) चिरईगांव निवासी भर्ती किया गया था, जिसका आयुष्मान कार्ड के अंतर्गत जिला अस्पताल में  इलाज प्रारंभ कर दिया गया। लेकिन किसी तरह इस मरीज की भनक दलालों एवं प्राइवेट हॉस्पिटलों के डॉक्टरों मिल गई। अब क्या था..इसके लिए वह एड़ी चोटी का जोर लगाने लगे। कहने लगे कि यह तो 5 लाख का ऐसा चेक है जो आयुष्मान योजना में पूरी तरह भज जाएगा। भाजपा नेता के करीबी कहे जाने वाले और जिला मुख्यालय पर भारी भरकम अस्पताल चलाने वाले चर्चित डॉक्टर साहब के लोग जबरी मरीज को ले जाने के लिए कुछ भी करने पर उतारू हो जाते हैं।   

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इसी मरीज को अपने हॉस्पिटल में भर्ती कराने के लिए जिला अस्पताल के आयुष्मान मित्र से जबरन कंसल्ट लिखवा कर छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। ऐसा करने आयुष्मान मित्र द्वारा इनकार किए जाने पर मरीज के परिजनों को समझा-बुझाकर कंसल्ट के माध्यम से जिला अस्पताल से निकालकर अपने हॉस्पिटल ले जाने का जिला अस्पताल के कर्मचारियों पर लगातार दबाव बनाकर ले जाने पर जोर दिया जा रहा था। अंत में जीत दलाल व एजेंट की हुयी और मरीज बिना अस्पताल वालों की सहमति के जिला अस्पताल से बाहर चला गया। 

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मरीज को जिला अस्पताल से जबरन खींच ले जाते हैं प्राइवेट हॉस्पिटल के दलाल, जानिए ताजा मामला


 

 

चीखता रह गया आयुष्मान मित्र

इस मामले में जिला अस्पताल में कार्य आयुष्मान मित्र ने बताया कि उनके द्वारा इस मरीज को यहां शनिवार की रात्रि में भर्ती कराया गया था और आज मरीज को बिना डिस्चार्ज कराए उसे प्राइवेट हॉस्पिटल में ले जाया जा रहा था। जिसकी जानकारी मेरे द्वारा उच्चाधिकारियों को दी गई। पर कोई कार्रवाई नहीं हुयी जिससे मरीज अस्पताल से चला गया।

इस संबंध में मरीज का इलाज कर रहे डॉक्टर जेपी सिंह ने बताया कि इस मरीज के पैर में चोट होने के कारण उसका प्लास्टर किया गया था और अभी उसका ऑपरेशन करना बाकी है, लेकिन पता चला है कि वह मरीज यहां से किसी प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए जा रहा है, जबकि तीन दिन से जिला अस्पताल में काम किया जा रहा है। 

वहीं इस मामले की शिकायत आयुष्मान मित्र द्वारा प्रभारी सीएमएस डॉ ज्ञान प्रकाश से की गई तो प्रभारी सीएमएस ने मामले की जांच कर कार्यवाही करने की बात कहने लगे।

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हीं मिल पा रहा है आयुष्मान मित्रों को वेतन
आयुष्मान मित्रों का वेतन जिला अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत इलाज हुए मरीजों से प्राप्त धनराशि से ही दिया जाता है, लेकिन यहां आने वाले मरीज जब प्राइवेट अस्पताल में भाग जाते हैं तो उनका हिसाब किताब जिला अस्पताल में नहीं होता है। इसी तरह की लापरवाही के कारण आयुष्मान मित्रों को 6 महीने से वेतन या मानदेय नहीं मिल रहा है।

चंदौली जिले में जिला अस्पताल के आसपास ढेर सारे अस्पताल इसी योजना का लाभ भजाने के चक्कर में खोल दिए गए हैं, जो थोड़ी दूर पर भी हैं तो अपने एजेंट व दलाल सेट करके अस्पताल में आने वालों पर कौवे की तरह नजर गड़ाए रखते हैं। जिला अस्पताल में आयुष्मान मरीजों के इलाज नहीं हो पा रहे हैं, जिसके कारण आयुष्मान मित्रों को मानदेय नहीं मिल रहा है। जबकि प्राइवेट हॉस्पिटलों के लिए आयुष्मान कार्डधारक मरीज इस समय भगवान स्वरूप हो गये हैं। उनका इलाज करके हर एक मरीज से लाखों का बिल बना ले रहे हैं। 

जिला हॉस्पिटल के लोग दलालों के आगे बेबस

कहा जा रहा है कि दलालों के इस कारगुजारी और जिला हॉस्पिटल सहित अन्य कर्मचारी अपने को लाचार और बेबस महसूस कर रहे हैं, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग में ऐसे अफसर नहीं है जो इस कारनामे पर लगाम लगा सकें। इस कदर ऐसे कृत्य करने वाले लोग अपने राजनीतिक पकड़ के कारण स्वास्थ्य महकमे पर जोरदार दबाव बनाए हुए हैं जिससे कि सरकारी तंत्र भी उनके आगे लाचार और बेबस बना हुआ है।

 अब देखना है कि ऐसे कृत्य करने वालों के ऊपर जिला प्रशासन या अस्पताल प्रशासन के द्वारा किस प्रकार की कार्यवाही की जाती है और आयुष्मान योजना के मरीजों का इलाज जिला अस्पताल में किस प्रकार सुनिश्चित कराया जाता है। या सब कुछ जानकर आंखों पर पट्टी बांधकर जिला अस्पताल में घूम रहे दलालों को बढ़ावा दिया जाता रहता है।

 

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