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जल्द नहीं सुलझने वाला है चकिया में बार-बेंच का विवाद, दोनों पक्ष अपनी जिद पर अड़े
चकिया बार एसोसिएशन चकिया के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद चकिया बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का न्यायिक कार्य से विरत रहकर लगातार कई दिनों से अपना धरना प्रदर्शन कर रहे हैं
 

नगर में जुलूस निकालकर प्रशासन को अपनी ताकत दिखाई

लगातार अधिवक्ताओं का आंदोलन जारी है

चकिया बार एसोसिएशन चकिया के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद चकिया बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का न्यायिक कार्य से विरत रहकर लगातार कई दिनों से अपना धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। अब धीरे धीरे उनको अन्य बार के लोगों का समर्थन मिलने की बात कही जा रही है। वहीं धरने प्रदर्शन से बेखौफ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीणा ने एसडीएम न्यायालय में बैठकर वाद कारियों के मुकदमों की नियमित सुनवाई जारी रखी और कहा कि फरियादियों को न्याय दिलाना हमारा काम है और हम करते रहेंगे। 


बाताया जा रहा है कि चकिया बार एसोसिएशन को सकलडीहा, चंदौली व अन्य जगहों के अधिवक्ताओं का उन्हें सहयोग मिलने के बाद आंदोलन की धार और तेज हो रही है। वहीं, चकिया बार एसोसिएशन कार्यालय में सभा करने के साथ-साथ अधिवक्ताओं ने नगर में जुलूस निकालकर प्रशासन को अपनी ताकत दिखाई तथा एसडीएम चकिया के हटने तक लगातार आंदोलन करने की बात कही।

आपको बता दें कि कुछ दिनों पूर्व बार एसोसिएशन द्वारा एक प्रस्ताव को एसडीएम चकिया ने खारिज करते हुए इसे अनावश्यक मानकर प्रस्ताव मानने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद लगातार अधिवक्ताओं का आंदोलन जारी है।

इस मामले पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व चकिया उप जिलाधिकारी प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा है कि बार व बेंच का काम है वादकारियों को सस्ता, सुलभ व त्वरित न्याय दिलाना और इसके लिए वह संकल्पित हैं। इसीलिए वह न्यायालय में बैठकर मामलों की सुनवाई लगातार करते रहे हैं। वह मामलों को बेवजह लटकाने के बजाय त्वरित न्याय में भरोसा रखते हैं। इसीलिए वह अपना काम कर रहे हैं और अधिवक्ताओं से अपील कर रहे हैं कि वह वादकारियों को त्वरित न्याय दिलाने में सहयोग करें। 

गौरतलब है कि बार तथा बेंच के बीच उचित सामंजस्य से ही न्यायिक कार्य को संपादित किया जा सकता है, लेकिन लगातार गतिरोध जारी रहने के कारण दोनों पक्षों में समझौते की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। वहीं कचहरी का चक्कर लगाकर आजिज आ चुके आम लोगों ने एसडीम द्वारा लगातार त्वरित निर्णय लेकर मामलों की लगातार सुनवाई करने से राहत की सांस ली है। अब देखना यह है कि कई दिनों से जारी गतिरोध का पटाक्षेप कब होता है।