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16 सितंबर 2009 के मामले में सरेंडर करते ही रामकिशुन को मिली जमानत
16 सितंबर 2009 को तत्कालीन थाना प्रभारी कैंट डीपी आर्या ने कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इस दौरान आरोप लगाया गया था कि वह कई थानों की फोर्स के साथ समाजवादी पार्टी के धरना-प्रदर्शन के मद्देनजर जिला मुख्यालय पर मौजूद थे।
 

16 सितंबर 2009 का मामला

बनारस में प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ का मामला

डीपी आर्या ने कैंट थाने में दर्ज कराया था मुकदमा

राजनीतिक धरने प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और सरकारी काम में बाधा डालने सहित अन्य आरोपों से संबंधित 13 साल पुराने एक मामले में चंदौली के पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने गुरुवार को वाराणसी की कोर्ट में सरेंडर किया। इसके बाद वाराणसी की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (पंचम) व  एमपी-एमएलए कोर्ट उज्ज्वल उपाध्याय की कोर्ट ने 20-20 हजार रुपए की दो जमानतें एवं बंधपत्र देने पर उन्हें रिहा करने का आदेश दे दिया। अदालत में पूर्व सांसद की ओर से अधिवक्ता रेयाजउद्दीन उर्फ बंटी खान ने पक्ष रखा।

बताया जा रहा है कि 16 सितंबर 2009 को तत्कालीन थाना प्रभारी कैंट डीपी आर्या ने कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इस दौरान आरोप लगाया गया था कि वह कई थानों की फोर्स के साथ समाजवादी पार्टी के धरना-प्रदर्शन के मद्देनजर जिला मुख्यालय पर मौजूद थे। उसी दौरान सांसद चंदौली रामकिशुन यादव के साथ पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह, विधायक अब्दुल समद अंसारी समेत सैकड़ों लोग जुलूस के साथ वहां पहुंचे। जब पुलिस ने जब सभी सपा के नेताओं को रोकने का प्रयास किया तो वह लोग उग्र हो गए और पुलिस से उलझ गए। सभी ने तोड़फोड़ करने के साथ ही सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने लगे।

इसी मामले में गुरुवार को पूर्व सांसद ने अपने अधिवक्ता के जरिए अदालत में सरेंडर कर जमानत के लिए अर्जी दी थी। सुनवाई के बाद अदालत ने जमानत अर्जी मंजूर कर ली गयी।

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