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चंदौली जिले में कम होगी धान की पैदावार, किसान बेहाल और परेशान
जिले में खरीफ के चालू सीजन में औसत से कम बारिश व खेती का दायरा घटने से धान का उत्पादन तो घटेगा ही उपज की गुणवत्ता में भी कमी आएगी।
 

चंदौली जिले में इस बार मानसून के धोखा देने और पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था न होने की वजह से चालू सीजन में 1,13,613 हेक्टेअर में धान की खेती होनी थी, लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष केवल 70 फीसदी ही धान की रोपाई हो सकी है। जबकि 32.5 क्विंटल प्रति हेक्टेअर उत्पादन का लक्ष्य इस बार रखा गया था, जिसके पूरा होने के आसार काफी कम दिख रहे हैं। 

जिले में खरीफ के चालू सीजन में औसत से कम बारिश व खेती का दायरा घटने से धान का उत्पादन तो घटेगा ही उपज की गुणवत्ता में भी कमी आएगी। कृषि विभाग की ओर से 113613 हेक्टेअर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इसके सापेक्ष 70 फीसदी ही धान की रोपाई हो पाई है। जबकि उत्पादन का लक्ष्य 32.5 क्विंटल प्रति हेक्टेअर रखा गया है।

Less Paddy Crop

आपको बता दें कि धान के कटोरे में अधिकांश किसानों ने जून माह के प्रथम पखवारे में धान की नर्सरी डाल दी थी। जुलाई के प्रथम सप्ताह तक नर्सरी रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार तो हो गई, लेकिन मानसून ने दगा दे दिया। जून माह के द्वितीय पखवारे में दो -तीन दिनों तक लगातार हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहा, लेकिन जुलाई व अगस्त में छिटपुट बारिश ही हुई।

हालांकि, किसानों ने नहरों व निजी साधनों से धान की रोपाई की है, लेकिन चिलचिलाती धूप से फसल पर प्रतिकूल असर तो पड़ ही रहा रोग का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में उत्पादन पर विपरीत असर पड़ेगा। वहीं किसान मौसम की दगाबाजी से परेशान हैं। गंगा किनारे की फसल बाढ़ की चपेट में आने से जहां बर्बाद हो गई, वहीं नौगढ़, चकिया, शहाबगंज आदि क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश के अभाव में शत प्रतिशत धान की रोपाई नहीं हो पाई तो पानी के अभाव में फसल सूख भी रही है। किसान चिंतित हैं।

जिला कृषि अधिकारी बसंत कुमार दूबे का दावा है कि औसत से कम बारिश के कारण धान के उत्पादन पर विपरीत असर पड़ेगा। चालू सीजन में 32.5 क्विंटल प्रति हेक्टेअर उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। देखिए लक्ष्य कहां तक पूरा हो पाता है।

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