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विकास की गंगा बहाने वालों ने नहीं सुनी फरियाद, खुद से बनाया बांस का पुल
इस पुलिया के टूटने से गांव के लोगों व पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं गांव में आने के लिए तीन किलोमीटर घूमकर पगडंडी के मार्ग से आना पड़ता है।
 

सिंचाई विभाग व नेताओं ने नहीं सुनी फरियाद

गांव के लोगों ने बनाया आने जाने का रास्ता

4 माह से परेशान थे गांव के लोग


चंदौली जिले के सराय रसूलपुर में जर्जर पुलिया को ध्वस्त हुए विगत चार माह बीत जाने के बाद भी मार्ग का निर्माण न होने पर ग्रामीणों ने खुद ही बांस से इस पार से उस पार आने जाने के लिए देसी जुगाड़ से रास्ता तैयार कर दिया है। शासन प्रसासन की बेरुखी से मार्ग का निर्माण न होने से 3 किलोमीटर लोगो को दूरी तय कर गांव में आना पड़ता था । इसे लेकर लोगों में आक्रोश भी ब्याप्त है।

सराय रसूलपुर गांव में जाने के लिए लोग नहर पर बने जर्जर पुलिया से होकर लोग आते जाते थे। विगत चार माह पूर्व बोगा ट्रैक्टर पर बालू लदे पुल से होकर गुजरने पर पुल क्षतिग्रस्त हो गया। ट्रैक्टर से क्षतिग्रस्त पुलिया होने पर ग्रामीणों ने जमकर हंगामा मचाया था। जिसपर सिंचाई विभाग ने पुल बनवाने की जिम्मेदारी लिया था। किन्तु बाद में सिंचाई विभाग के लोग भी ट्रैक्टर चालक से सुबिधा शुल्क लेकर गायब हो गये। लोगों को आने जाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। 

इस पुलिया के टूटने से गांव के लोगों व पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं गांव में आने के लिए तीन किलोमीटर घूमकर पगडंडी के मार्ग से आना पड़ता है। ग्रामीणों ने पुल निर्माण के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से भी गुहार लगायी। शासन प्रशासन की बेरुखी से आजिज आकर गांव के ही कमाल अख्तर, रामकृत कुशवाहा, जयराम शर्मा, कलीम अली, बालमुकुंद कुशवाहा, शिवबचन कुशवाहा, सुभाष मौर्य, पीयूष, बाबू, कुंदन, कमलेश, सूरज, विशाल, शुभम ने खुद ही बांस से रास्ता तैयार कर दिया। 

प्रशासन की बेरुखी से लोगों में आक्रोश दिख रहा है और लोग कह रहे हैं विकास की गंगा बहाने वाले राजनेता व अधिकारियों को गांव के लोगों की समस्या से कोई लेना देना नहीं है। सारे लोग सेवा पखवाड़ा मनाने में व्यस्त हैं।

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