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फैक्ट्री में हो रहा था खेती वाली यूरिया का इस्तेमाल, इस कपंनी के खिलाफ होगी कार्रवाई

जिले में स्थापित सभी औद्योगिक इकाइयों को सख्त चेतावनी दी गई है कि वे टेक्निकल ग्रेड यूरिया खरीदते समय यह सुनिश्चित करें कि इसमें नीम कोटेड यूरिया की मिलावट न हो।
 

औद्योगिक इकाई में हो रहा था 'यूरिया' का इस्तेमाल

मालिकों पर मुकदमा दर्ज होने से मचा हड़कंप

अधिकारियों की टीम ने किया था औद्योगिक इकाइयों पर औचक निरीक्षण

चंदौली जनपद में एक औद्योगिक इकाई के खिलाफ अनुदानित नीम कोटेड यूरिया का अवैध रूप से उपयोग करने पर मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई प्रमुख सचिव कृषि, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के आदेश के बाद की गई। इस घटना ने उन सभी औद्योगिक इकाइयों को सचेत कर दिया है जो टेक्निकल ग्रेड यूरिया (TGU) का उपयोग करती हैं।

क्या है पूरा मामला?

प्रदेश सरकार ने औद्योगिक इकाइयों द्वारा अनुदानित नीम कोटेड यूरिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसी क्रम में, 18 जून, 2025 को जिला प्रशासन द्वारा एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव और सहायक प्रबंधक उद्योग शामिल थे। इस टीम ने रामनगर, चंदौली में स्थित औद्योगिक इकाइयों पर औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान, मैसर्स अग्रवाल फाडर इंडस्ट्रीज के प्रतिष्ठान से रॉयल ट्रेडिंग, दिल्ली द्वारा आपूर्ति किए गए टेक्निकल ग्रेड यूरिया का एक नमूना लिया गया। इस नमूने को निर्दिष्ट प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया, जहाँ इसका परिणाम 'अमानक' (substandard) पाया गया।

नमूने में मिली नीम ऑयल की मात्रा
परीक्षण के परिणामों में यह बात सामने आई कि नमूने में नीम ऑयल की मात्रा मौजूद थी। यह एक महत्वपूर्ण खुलासा है क्योंकि कृषि उपयोग के लिए सब्सिडी वाली यूरिया में ही नीम ऑयल का मिश्रण किया जाता है, जबकि औद्योगिक उपयोग के लिए टेक्निकल ग्रेड यूरिया में नीम ऑयल की मात्रा शून्य होनी चाहिए।

यह स्पष्ट है कि औद्योगिक इकाई में टेक्निकल ग्रेड यूरिया के बजाय कृषि के लिए मिलने वाले नीम कोटेड यूरिया का उपयोग किया जा रहा था। यह कार्रवाई शासनादेश संख्या 1022/12.02.2023 (10 जुलाई 2023) और 1272/12.02.2023 (18 अगस्त 2023) के साथ-साथ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 का सीधा उल्लंघन है।

सख्त कार्रवाई और चेतावनी
जांच रिपोर्ट के आधार पर, जिलाधिकारी के निर्देश पर मैसर्स अग्रवाल फाडर इंडस्ट्रीज, रामनगर और आपूर्तिकर्ता रॉयल ट्रेडिंग, दिल्ली के खिलाफ आज, 18 सितंबर, 2025 को उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है।

इस घटना के बाद, जिले में स्थापित सभी औद्योगिक इकाइयों को सख्त चेतावनी दी गई है कि वे टेक्निकल ग्रेड यूरिया खरीदते समय यह सुनिश्चित करें कि इसमें नीम कोटेड यूरिया की मिलावट न हो। उन्हें आपूर्तिकर्ता से इस संबंध में पूरी तरह से पुष्टि करने के बाद ही खरीद और उपयोग करने के लिए कहा गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगर भविष्य में किसी भी इकाई और उसके आपूर्तिकर्ता द्वारा ऐसा उल्लंघन पाया गया तो उनके खिलाफ भी इसी तरह की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिला स्तरीय गठित टीम को नियमित रूप से इन इकाइयों का आकस्मिक निरीक्षण करने और नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि इस तरह के अवैध कार्यों को रोका जा सके।

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