बारिश भी नहीं रोक पाई आस्था: बाबा कीनाराम के 426वें जन्मोत्सव में उमड़ी लाखों की भीड़
सिद्ध कुएं की महिमा देख विभोर हुए भक्त
विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने बाबा कीनाराम के जीवन और दर्शन पर चर्चा
जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग और पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे भी पहुंचे
चंदौली जिले के बाबा कीनाराम के मठ रामगढ़ में बारिश और खराब मौसम भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सका। चंदौली जिले के रामगढ़ स्थित बाबा कीनाराम मठ में आयोजित बाबा कीनाराम के 426वें जन्मोत्सव समारोह में शनिवार को दूसरे दिन भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। भक्तों ने लंबी कतारों में लगकर बाबा कीनाराम के दरबार में मत्था टेका और उनका दर्शन-पूजन किया।

आस्था और मेले का संगम
जन्मोत्सव का यह समारोह पीठाधीश्वर सिद्धार्थ गौतम राम जी के निर्देशन में धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह से ही क्षेत्रीय और दूरदराज से आए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंगला पाठक, दीपक यादव, मोहन तिवारी और अविनाश सिंह जैसे कलाकारों ने सुबह 9 बजे से रामायण गान प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया।

बारिश के कारण मेले में लगे झूले और चरखी कुछ देर के लिए बंद हो गए थे, लेकिन बारिश रुकने के बाद बच्चों ने फिर से उनका भरपूर लुत्फ उठाया। मेले में खिलौनों की दुकानों पर भी खूब भीड़ देखने को मिली। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। क्षेत्राधिकारी स्नेहा तिवारी और बलुआ इंस्पेक्टर डॉ. आशीष मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों पुलिसकर्मी, महिला पुलिस और पीएसी के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात थे। उपजिलाधिकारी कुंदन राज कूपर और दोपहर बाद पहुंचे जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग और पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे ने भी मेले का जायजा लिया और व्यवस्थाओं को परखा।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में झूमे श्रोता
मठ के अंदर बने सांस्कृतिक मंच पर आयोजित कार्यक्रमों में श्रोता झूम उठे। हरिशंकर तिवारी, दिव्या दुबे, छोटू पाण्डेय और लोकनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने बाबा कीनाराम के जीवन और संदेशों पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए। दोपहर 2 बजे के बाद रौनक श्रीवास्तव, मानसी शर्मा और ऋचा पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत किए गए कथक नृत्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। देर रात तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भजन सम्राट रबीन्द्र ज्योति, भोजपुरी कलाकार मनोहर सिंह, गायिका अलका पहड़िया और भोजपुरी गायक बीरेन्द्र भारती ने भी अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

सिद्ध कुएं की महिमा और विचार गोष्ठी
मठ के अंदर स्थित सिद्ध चार द्वार के कुएं पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। ऐसी मान्यता है कि इस कुएं में स्नान करने और इसका पानी पीने से रोग दूर होते हैं। इस कुएं को स्वयं बाबा कीनाराम ने अपने हाथों से निर्मित किया था।
जन्मोत्सव के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने बाबा कीनाराम के जीवन और दर्शन पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर विनय शंकर शुक्ला ने कहा कि जिस दिन काशी का जन्म होता है, उसी दिन अघोराचार्य का जन्म होता है। प्रोफेसर विकास शुक्ला ने कहा कि बाबा कीनाराम ने पूरे विश्व के कल्याण हेतु अलग-अलग लोगों की परेशानियों को समझा और उनका निदान किया। प्रो. देवब्रत चौबे ने कहा कि बाबा के दिखाए मार्ग पर चलकर समाज को सही दिशा दी जा सकती है। सूबेदार सिंह ने कहा कि बाबा की साधना वैष्णव संप्रदाय से शुरू हुई और बाद में उन्होंने अघोर परंपरा के रास्ते पर चलकर समाज को कुरीतियों से लड़ने के लिए प्रेरित किया। अशोक पाण्डेय ने कहा कि बाबा ने अपने समय से ही धर्म परिवर्तन के खिलाफ लोगों को प्रेरित करने का कार्य किया।

एडीजी वाराणसी पीयूष मोडिया ने भी जिलाधिकारी के साथ बाबा कीनाराम का दर्शन-पूजन किया और पीठाधीश्वर सिद्धार्थ गौतम राम से आशीर्वाद लिया। यह आयोजन न केवल भक्तों की आस्था का केंद्र बना, बल्कि बाबा कीनाराम के सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान को भी याद करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
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