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इसलिए बिंद बिरादरी के लोग अपने लिए मांग रहे हैं विधानसभा का टिकट, सैयदराजा व मुगलसराय में दावेदारी
चंदौली जिले में जातिगत आंकड़े इकट्ठा करके उसके आधार पर विधानसभा चुनाव का टिकट मांगने वालों की तादाद धीरे-धीरे बढ़ गई है।
 

बिंद बिरादरी के लोग अपने लिए मांग रहे हैं विधासभा का टिकट

सैयदराजा व मुगलसराय में दावेदारी

चंदौली जिले में जातिगत आंकड़े इकट्ठा करके उसके आधार पर विधानसभा चुनाव का टिकट मांगने वालों की तादाद धीरे-धीरे बढ़ गई है। कुछ ऐसी ही दावेदारी चंदौली जिले में समाजवादी पार्टी की टिकट के लिए कुशवाहा, यादव या बिंद बिरादरी दावेदारों के द्वारा की जा रही है। बिंद बिरादरी अपनी दावेदारी मुगलसराय और सैयदराजा विधानसभा की सीटों पर करता है, क्योंकि उसके द्वारा दावा किया जाता है कि इस जाति के वोटर यहां पर निर्णायक साबित होंगे।

चंदौली जिले में विधानसभा सीटों के चुनाव में आमतौर पर बड़े राजनीतिक दल बिन्द समाज की उपेक्षा करते देखे गए हैं और बिंद समाज भी अपने अपने एजेंडे के हिसाब से अलग अलग दलों का वोट बैंक बनकर रहने लगा है। लेकिन अबकी बार बिरादरी के नुमाइंदे एक दल में एकजुट होने की उम्मीद जता रहे हैं। जिस दल से बिरादरी के किसी दावेदार को टिकट मिलेगा उस दल को बिंदों का 90 फीसदी वोट मिलेगा।

अब तक केवल दो बार मिला टिकट

चंदौली जिले में अब तक देखा जाय तो केवल 2 बार बिंद बिरादरी को विधानसभा का टिकट मिला है। एक बार बहुजन समाज पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में तिलकधारी बिंद को टिकट दिया था, तो वहीं एक बार कांग्रेस पार्टी के टिकट पर एक और उम्मीदवार सतीश बिंद मुगलसराय इलाके से चुनाव लड़ चुके हैं। 

बिंद समुदाय का दावा है कि चंदौली जिले की 2 विधानसभा सीटों पर बिंद बिरादरी की भूमिका है। मुगलसराय विधानसभा सीट पर 35 से 40 हजार तो वहीं सैयदराजा विधानसभा सीट पर 45 से 50 हजार बिंद समाज के मतदाता हैं। इसलिए राजनीतिक दलों पर इनकी दावेदारी का दबाव है। कहा जा रहा है कि जिस पार्टी के द्वारा बिंद समुदाय के लोगों को चुनाव में विधानसभा का टिकट दिया जाएगा। उस तरफ बिंद समुदाय अपना सीधा रुख कर सकते हैं।

नहीं उभरा जनपद में बिंद बिरादरी का कोई नेता 

बिंद बिरादरी के लोगों का कहना है कि चंदौली जनपद में बिंद बिरादरी का कोई नेता इसलिए नहीं पनप सका क्योंकि हर दल के बड़े नेता दूसरे जिलों से आकर चंदौली में बिरादरी की राजनीति करते रहे हैं। चुनाव बाद वह लोगों को छोड़ कर चले जाते हैं। अबकी बार विधानसभा चुनाव में बिंद बिरादरी के लोगों ने फैसला किया है कि वह अपना एक नया नेता तैयार करेंगे और जिसे चुनाव में विधानसभा का टिकट मिल जाएगा, उसके साथ सक्रियता से आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

बिंद समाज के मतदाता निर्णायक 

 जहां तक सैयदराजा विधानसभा सीट की बात है यह सीट मतदाताओं की संख्या हिसाब से पिछड़ी जाति बाहुल्य वाली बताई जा रही है। बिरादरी के लोगों का दावा है कि अगर सैयदराजा विधानसभा के धानापुर और बरहनी ब्लाक को देखा जाए तो इस इलाके में कुल 16 ग्राम प्रधान 17 बीडीसी सदस्य चुनाव जीत कर आए हैं तथा दोनों ब्लाकों में लगभग 200 से अधिक गांव में बिंद मतदाताओं की आबादी है। उसके साथ साथ तीन सौ पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की संख्या को देखा जाए तो वहां बिंद समाज के मतदाता निर्णायक साबित हो सकते हैं।

मतों का विभाजन रोकने के लिए कोशिश

 बिंद समाज के नेता सुदर्शन केंद्र का कहना है कि बहुसंख्यक जातियों में बिंद समाज पूरे जनपद में पहले पहले पांच जातियों में आता है और अगर उसके मतों का विभाजन होने से बचाना है तो बिंद समाज की किसी एक उम्मीदवार को अपने पार्टी का टिकट देना तय करना चाहिए। तभी यह जाति एकजुट होगी। फिलहाल समाजवादी पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष बिरेंद्र कुमार बिंद के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। इसलिए समाजवादी पार्टी को अबकी बार विधानसभा चुनाव में बिंद समुदाय की ओर ध्यान देना चाहिए।

 तमाम छोटी जातियां तैयार

एक और बिंद समाज के नेता ने कहा कि अबकी बार अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए बिंद, केवट, निषाद, मल्लाह जैसी तमाम छोटी जातियां तैयार हैं। टिकट मिलते ही बिरादरी के लोग तन-मन-धन से आगे की आकर सपा के उम्मीदवार को जिताने की पहल करेंगे। ऐसे में समाजवादी पार्टी को भी उस बिरादरी के सम्मान के लिए और राजनीतिक संरक्षण के लिए एक ऐसे व्यक्ति को टिकट देना चाहिए जो उनके समाज के साथ न्याय उचित तरीके से कार्य कर सके।

...टिकट नहीं मिला तो

चंदौली जिले में 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके बिंद समाज के जिला अध्यक्ष रामचंद्र बिंद का कहना है कि सैयदराजा विधानसभा में 50,000 से अधिक वोट बिंद समाज और उससे संबंधित जातियों का है। अगर समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष बिरेंद्र कुमार बिंद डॉक्टर को अपना उम्मीदवार बनाती है, तो पूरी बिरादरी का वोट इन के पाले में खड़ा हो जाएगा और समाजवादी पार्टी बड़ी मजबूती से चुनाव लड़ पाएगी। वहीं इस बात की भी संभावना व्यक्त करते हैं कि अगर उनको टिकट नहीं मिला तो बिंद समाज के वोटों का बंटवारा होगा और इसका फायदा अन्य दलों को हो सकता है। 

बिंद बिरादरी आंख मूंदकर करेगी समर्थन 

इस बार बारे में अरंगी गांव के रहने वाले हनुमान बिंद का कहना है कि बिरेंद्र बिंद जिले में बिंद समाज के नेता के साथ साथ समाजवादी पार्टी में भी काफी लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं और पार्टी के छोटे बड़े आयोजनों में शिरकत करते हैं। अगर उन्हें समाजवादी पार्टी अपना उम्मीदवार बनाती है, तो 90% बिंद बिरादरी का वोट इन के पाले में आ जाएगा और सैयदराजा विधानसभा का समीकरण देखा जाए तो यादव, मुसलमान और बिंद बिरादरी का वोट अगर एकजुट हो गया तो समाजवादी पार्टी को कोई नहीं हरा सकता है। अब की बार बिंद समाज अपनी बिरादरी का उम्मीदवार चाह रहा है, जो दल बिंद बिरादरी पर भरोसा जताएगा, बिंद बिरादरी आंख मूंदकर उसी राजनीतिक दल को अपने समाज का वोट दिलवाने का काम करेगी।