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चंदौली में गोशालाओं की निगरानी के लिए लगेंगे CCTV कैमरे, कर्मचारियों की लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

जिले की 23 गोशालाओं और कांजी हाउस में यह सुविधा लागू की जाएगी, ताकि गोशालाओं में कर्मचारियों की लापरवाही पर तुरंत अंकुश लगाया जा सके और गोवंशीयों की भलाई सुनिश्चित की जा सके।
 

गोशालाओं में सीसीटीवी निगरानी का फैसला

जिले की 23 गोशालाओं और कांजी हाउस में सुविधा लागू

अधिकारी अपने दफ्तर से लाइव निगरानी कर सकेंगे

चंदौली जिले में गोशालाओं में गोवंशीयों की देखरेख और चारा-पानी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने अब सीसीटीवी कैमरे लगाने का बड़ा निर्णय लिया है। जिले की 23 गोशालाओं और कांजी हाउस में यह सुविधा लागू की जाएगी, ताकि गोशालाओं में कर्मचारियों की लापरवाही पर तुरंत अंकुश लगाया जा सके और गोवंशीयों की भलाई सुनिश्चित की जा सके।

मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साईं ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य गोशालाओं में चारा, पानी और संरक्षण संबंधी सभी व्यवस्थाओं पर निगरानी रखना है। बीते वर्ष शासन द्वारा कैमरे लगाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन प्रक्रिया शुरू होने में विलंब हुआ। अब पशुपालन विभाग ने आवश्यक डिमांड शासन को भेजी और कार्रवाई शुरू हो गई। कैमरे लगाने की जिम्मेदारी बैंकर्स को दी गई है, जो कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड के माध्यम से इसे क्रियान्वित करेंगे।

बताते चलें कि जनपद में कुल 23 गोशाला और कांजी हाउस हैं, जिनमें लगभग 13,997 गोवंश संरक्षित हैं। इनमें चार गोशालाएं नगरीय क्षेत्र पीडीडीयू नगर, सैयदराजा, सदर (चंदौली) और चकिया में हैं, जहां लगभग 452 गोवंश संरक्षित हैं। कैमरों के माध्यम से अधिकारी अपने कार्यालय से राउटर के जरिए लाइव निगरानी कर सकेंगे। डीएम, सीडीओ और सीवीओ अपने दफ्तर में बड़ी स्क्रीन पर किसी भी गोशाला की स्थिति एक क्लिक में देख सकते हैं।

कैमरों में लगे चिप के माध्यम से एक महीने तक फुटेज सुरक्षित रहेगा। इसका मतलब यह है कि किसी भी शिकायत की स्थिति में अधिकारी एक महीने पुराना फुटेज देखकर वास्तविक स्थिति का पता लगा सकते हैं। इससे शिकायतों की जांच में आसानी होगी और गोशालाओं में होने वाली लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी।

सभी गोशालाओं में उनके आकार और आवश्यकता के अनुसार 8 से 16 कैमरे लगाए जाएंगे। इससे न केवल गोशाला कर्मचारियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित होगी, बल्कि गोवंशीयों के चारा और पानी की कमी या अन्य समस्याओं पर तुरंत ध्यान दिया जा सकेगा। कैमरों की निगरानी से प्रशासन को गोशालाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

डा. जेके चौहान, डिप्टी सीवीओ और नोडल अधिकारी गोशाला ने बताया कि सितंबर के अंत तक यह कार्य शुरू होने की संभावना है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की गोशालाओं में गोवंशीयों की सुरक्षा, संरक्षण और देखभाल की गुणवत्ता बेहतर होगी।

इस पहल के माध्यम से गोशालाओं में नियमित निगरानी होगी और कर्मचारियों को सतर्क रहना होगा। चारा-पानी की व्यवस्था में सुधार के साथ ही गोशालाओं से जुड़ी शिकायतों का त्वरित समाधान भी संभव होगा। प्रशासन का मानना है कि यह कदम गोवंशीय संरक्षण को मजबूत करने के साथ-साथ गोशालाओं के सुचारू संचालन और जिम्मेदार प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

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