UGC New Bill Update:नया बिल बढ़ाएगा जातिगत वैमनस्य, वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष पाठक ने राष्ट्रपति को भेजा पत्रक
चंदौली के वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार पाठक ने नए यूजीसी बिल को भेदभावपूर्ण बताते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। उनका आरोप है कि यह बिल उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत जहर घोलेगा और सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करेगा।
नये यूजीसी बिल के खिलाफ अधिवक्ताओं का प्रदर्शन
सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य पर मंडराया संकट
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता छीनने का सरकार पर आरोप
इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग की भागीदारी की मांग
झूठी शिकायत पर कार्रवाई न होना न्याय के विरुद्ध
चंदौली जनपद के वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार पाठक के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नए यूजीसी बिल (UGC Bill) के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक पत्रक प्रभारी एसडीएम (ऑफिस इंचार्ज) पवन कुमार यादव को सौंपा। वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष पाठक ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि नए बिल के प्रावधान उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत वैमनस्य बढ़ाने वाले और समाज को बांटने वाले हैं।
सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप
ज्ञापन सौंपने के दौरान संतोष पाठक ने बिल के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नए नियमों के अनुसार, यदि कोई आरक्षित वर्ग का छात्र सामान्य वर्ग के छात्र के खिलाफ शिकायत करता है, तो बिना गहन जांच के भी सामान्य वर्ग के छात्र को विश्वविद्यालय से निकाला जा सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि जांच में शिकायत झूठी पाई जाती है, तो भी शिकायतकर्ता के विरुद्ध कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। यह नियम सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर सकता है। उन्होंने मांग की कि झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सरकार का प्रहार
अधिवक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार इस बिल के माध्यम से हर संवैधानिक और शैक्षणिक संस्थान को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है। नए प्रावधानों के बाद विश्वविद्यालय अपनी वित्तीय आवश्यकताओं के लिए सीधे केंद्र के अधीन हो जाएंगे, जिससे उनकी स्वायत्तता (Autonomy) समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा, छात्रों की समस्याओं के निवारण के लिए गठित 'इक्विटी कमेटी' में सामान्य वर्ग के सदस्यों को शामिल न करना भी अन्यायपूर्ण बताया गया।
न्याय की मांग और उपस्थित अधिवक्ता
संतोष पाठक ने स्पष्ट किया कि सामान्य वर्ग हमेशा से सभी को साथ लेकर चलने का पक्षधर रहा है, लेकिन न्याय का तकाजा यह है कि किसी एक वर्ग के साथ भेदभाव न हो। जिलाधिकारी के प्रतिनिधि पवन कुमार यादव ने पत्रक स्वीकार करते हुए इसे महामहिम राष्ट्रपति तक भेजने का आश्वासन दिया। इस दौरान मुख्य रूप से ललित शर्मा एडवोकेट, संतोष कुमार तिवारी एडवोकेट, रजनीश कुमार सिंह 'डबलू' सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित रहे
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