चंदौली में 'दिशा' की बैठक या सिर्फ खानापूर्ति? न बजट का पता न आंकड़ों का खेल, बंद कमरे में हुई समीक्षा पर उठे सवाल
चंदौली कलेक्ट्रेट में सांसद वीरेन्द्र सिंह की अगुवाई में 'दिशा' समिति की बैठक हुई। विकास कार्यों और नहरों में पानी छोड़ने की समीक्षा तो हुई, लेकिन बैठक में पारदर्शिता, बजट और आंकड़ों की कमी को लेकर तीखी चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
आंकड़ों और बजट के बिना बैठक
नेताओं और अफसरों का दिखा गठजोड़
लापरवाही पर सांसद ने जताई नाराजगी
नहरों में तुरंत पानी छोड़ने के निर्देश
विधायकों ने उठाई क्षेत्र की समस्याएं
चंदौली के कलेक्ट्रेट सभागार में मंगलवार को जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति यानी 'दिशा' की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाईप्रोफाइल बैठक संपन्न हुई। इस बैठक की अध्यक्षता क्षेत्र के माननीय सांसद वीरेन्द्र सिंह ने की। वैसे तो इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले के विकास को रफ्तार देना, सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारना और जनता की समस्याओं का तुरंत हल निकालना था, लेकिन बैठक के अंदर और बाहर के माहौल को देखकर कई गंभीर सवाल भी खड़े होने लगे हैं।
आम जनता के बीच चर्चा है कि जहां एक तरफ पारदर्शिता और जवाबदेही की बातें की जाती हैं, वहीं इस बैठक में न तो कोई ठोस आंकड़ा सामने आया और न ही किसी खास बजट का ब्यौरा ठीक से रखा गया। ऐसा लगा मानो पूरी बैठक सिर्फ एक तय सेटिंग के तहत औपचारिकता पूरी करने के लिए की गई थी। सूचना विभाग की विज्ञप्ति पढ़कर ऐसा लगता है कि मीटिंग को केवल कागजी खानापूर्ति के लिए किया गया था, क्योंकि मीटिंग की प्रेस विज्ञप्ति में न तो कोई आंकड़ा था और न ही कोई बजट। ऐसा लग रहा था कि जिले में सब कुछ अच्छा चल रहा है। इसके लिए सबने एक सुर से बंद कमरे में हामी भर दी।

बंद कमरे का गठजोड़
बैठक के दौरान एक हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला, जिसे लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में कानाफूसी तेज हो गई है। आम जनता के मुद्दों पर आमने-सामने रहने वाले सत्तापक्ष और विपक्ष के तमाम दिग्गज नेता कलेक्ट्रेट के बंद कमरे में प्रशासनिक अफसरों के साथ एक सुर में नजर आए। नेताओं और अधिकारियों के बीच इस तरह का तालमेल देखकर ऐसा लगा कि बाहर चाहे जो भी राजनीति हो, अंदर सब एक हैं। हालांकि, जनता को दिखाने के लिए मंच से अधिकारियों को कड़ी फटकार भी लगाई गई और विकास कार्यों को समय पर व पूरी ईमानदारी से करने के निर्देश भी जारी किए गए, लेकिन इस 'दिखावे के कड़े रुख' के पीछे की असलियत किसी से छिपी नहीं रही।
अधिकारियों के गोलमोल जवाब पर बिफरे सांसद
बैठक की शुरुआत जैसे ही पिछली बैठक में लिए गए फैसलों की समीक्षा से हुई, वैसे ही विभागों की पोल खुलने लगी। सांसद वीरेन्द्र सिंह ने जब पिछली बार की अधूरी जनसमस्याओं और रुके पड़े विकास कार्यों की ताजा रिपोर्ट मांगी, तो ज्यादातर विभागों के बड़े अधिकारी बगले झांकने लगे। सड़क निर्माण, पीने के पानी की किल्लत और बिजली विभाग से जुड़े अहम मुद्दों पर जब अधिकारियों ने टालमटोल वाला रवैया अपनाया और गोलमोल जवाब देने की कोशिश की, तो सांसद ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के आखिरी पायदान पर बैठे गरीब व्यक्ति तक बिना किसी भ्रष्टाचार के पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास के कामों में ढिलाई या लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।

किसानों और गर्मी की समस्याओं पर फोकस
इस बैठक में गर्मी के भीषण मौसम को देखते हुए पानी और बिजली की समीक्षा प्रमुखता से की गई। जल जीवन मिशन, हर घर नल से जल योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा विभाग के कामों को परखा गया। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश किसानों को लेकर दिया गया। धान की नर्सरी तैयार करने का समय आ गया है, जिसे देखते हुए सांसद ने सिंचाई विभाग को तुरंत नहरों में पानी छोड़ने का आदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि अगर किसानों को वक्त पर पानी नहीं मिलेगा, तो वे खेती कैसे शुरू कर पाएंगे? इसके साथ ही उन्होंने जिले में पर्याप्त मात्रा में बीज, खाद और कीटनाशक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा ताकि कोई भी किसान भाई परेशान न हो।
नेताओं की लंबी फौज ने गिनाए घिसे पिटे काम
इस उच्च स्तरीय बैठक में केवल सांसद वीरेन्द्र सिंह ही नहीं, बल्कि इलाके के कई अन्य बड़े जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। राबर्ट्सगंज के सांसद छोटेलाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती साधना सिंह और श्रीमती दर्शना सिंह ने भी जनता की परेशानियों को सदन के सामने रखा। वहीं सैयदराजा के विधायक सुशील सिंह, चकिया के विधायक कैलाश आचार्य और सकलडीहा के विधायक प्रभु नारायण यादव ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों की टूटी सड़कों, बिजली और पानी की स्थानीय समस्याओं को उठाया और अफसरों को तुरंत काम करने को कहा। बैठक के आखिरी दौर में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के नेतृत्व में सभी जिले के अधिकारियों ने सांसद और विधायकों को भरोसा दिलाया कि बैठक में जो भी निर्देश दिए गए हैं, उनका पूरा पालन किया जाएगा और जमीन पर काम दिखाई देगा।
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