चंदौली जल जीवन मिशन में बड़ा खेल? 30% काम और कमीशनखोरी के आरोप, अब हर प्रोजेक्ट पर होगी 'सर्जिकल स्ट्राइक'
चंदौली में 'हर घर जल' योजना में भारी अनियमितताओं के बाद जिलाधिकारी ने सभी 474 प्रोजेक्ट्स की सघन जांच के आदेश दिए हैं। कमीशनखोरी के आरोपों और अधूरे कार्यों के बीच सीडीओ के नेतृत्व में बनी टीम 7 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
चंदौली के 474 प्रोजेक्ट्स की होगी सघन जांच
सात दिन के भीतर टीम सौंपेगी विस्तृत रिपोर्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सख्त कार्रवाई
सत्तापक्ष पर कमीशनखोरी और वसूली के गंभीर आरोप
जल जीवन मिशन की समय सीमा अब 2028 तक
चंदौली जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'हर घर जल योजना' अब जांच के घेरे में है। जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग ने जिले में स्वीकृत सभी 474 प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और प्रगति की सघन जांच के लिए एक विशेष तकनीकी टीम का गठन किया है। इस आदेश के बाद विभाग और कार्यदायी संस्थाओं में हड़कंप मच गया है। ऐसा माना जा रहा भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी के आरोपों से ये जांच कराने की नौबत आयी है, ताकि पैसे कमाने वालों की पोल खुल सके।
सीडीओ के नेतृत्व में सात दिन का 'अल्टीमेटम'
जिलाधिकारी के निर्देशानुसार, इस हाई-लेवल जांच टीम का नेतृत्व मुख्य विकास अधिकारी (CDO) करेंगे। इस विशेष टीम में लोक निर्माण विभाग (PWD) के विशेषज्ञों के साथ-साथ अन्य निर्माण एजेंसियों के अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और अवर अभियंताओं को भी शामिल किया गया है। टीम को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक साइट पर जाकर भौतिक सत्यापन करें और सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपें।
मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद जागा प्रशासन
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'जल जीवन मिशन' की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी। उन्होंने स्पष्ट आदेश दिए थे कि पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों को तुरंत ठीक किया जाए और लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों पर भारी जुर्माना लगाया जाए। इसी क्रम में जब चंदौली डीएम ने रैंडम जांच करवाई, तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आईं। पाइपलाइन से लेकर पंप हाउस तक के निर्माण की स्थिति दयनीय पाई गई है।
कमीशनखोरी और मारपीट के आरोपों से गरमाया माहौल
प्रशासनिक जांच के साथ-साथ इस योजना को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म है। स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चंदौली में यह योजना सत्तापक्ष की कमीशनखोरी और ठेकेदारों से वसूली की भेंट चढ़ गई है। उल्लेखनीय है कि अलीनगर और मुगलसराय क्षेत्र में पहले भी वसूली और मारपीट की शिकायतें मिल चुकी हैं, जिनमें सत्तापक्ष से जुड़े लोगों के नाम सामने आए थे। हालांकि, बाद में इन मामलों में 'लीपापोती' के आरोप लगे, लेकिन अब डीएम की इस सघन जांच से सच्चाई सामने आने की उम्मीद जगी है।
आंकड़ों में ऐसी है योजना की सुस्त रफ्तार
योजना के जमीनी हालात आंकड़ों के आइने में काफी चिंताजनक हैं। चंदौली जिले में अब तक केवल 30% काम ही पूरा हो सका है। जबकि 1500 राजस्व गांवों में पाइपलाइन बिछाई जानी है, जिसकी कुल लंबाई दस्तावेजों के अनुसार 8 किलोमीटर दर्शाई गई है। कहा जा रहा है कि ये काम काम 2021 से प्रस्तावित था, उसकी सुस्त चाल को देखते हुए शासन ने अब इसका लक्ष्य बढ़ाकर 2028 कर दिया है। इस परियोजना का काम करने के लिए कुल 5 अलग-अलग फर्मों को काम की जिम्मेदारी सौंपी गई है, फिर काम में तेजी नहीं दिखी।
सीडीओ आर. जगत साई का दावा
जिले के सीडीओ आर. जगत साई ने बताया, "रैंडम जांच में परियोजनाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली है। इसे गंभीरता से लेते हुए अब प्रत्येक प्रोजेक्ट की व्यक्तिगत रूप से जांच कराई जा रही है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को इस योजना का लाभ समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से मिले।"
अब देखना यह होगा कि इस उच्च स्तरीय जांच में किन बड़े चेहरों पर गाज गिरती है और चंदौली के प्यासे गांवों तक शुद्ध जल कब तक पहुंच पाता है।
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