नदी पाटने के आरोप पर DM सख्त: चंदौली में गड़ई नदी को पाटने पर होगा एक्शन, फसल बर्बादी की भी होगी जांच
चंदौली में पीडीडीयू नगर-चकिया मार्ग चौड़ीकरण के दौरान गड़ई नदी को पाटने के गंभीर आरोप लगे हैं। किसानों की बर्बाद हुई फसलों और सिंचाई विभाग के दावों के बीच डीएम ने जांच टीम गठित कर दी है। क्या है पूरा मामला? विस्तार से पढ़ें।
जिलाधिकारी ने गठित की उच्च स्तरीय जांच टीम
नदी पाटने से सैकड़ों किसानों की फसल बर्बाद
सिंचाई विभाग और पीडब्ल्यूडी के बीच तकरार
भाजपा नेता के नेतृत्व में डीएम से मिले किसान
गोधना से लेवा तक सड़क चौड़ीकरण का मामला
चंदौली जिले में विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पीडीडीयू नगर से चकिया मार्ग के चौड़ीकरण के दौरान गड़ई नदी के हिस्से को कथित तौर पर पाटने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। इस मामले में किसानों की शिकायतों और फसल बर्बादी की गूंज शासन तक पहुंचने के बाद, जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने एक विशेष जांच टीम का गठन किया है। यह टीम मौके का मुआयना कर नदी के स्वरूप और किसानों को हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।
किसानों ने लगाए गंभीर आरोप
यह पूरा मामला गोधना से लेवा तक सड़क चौड़ीकरण कार्य से जुड़ा है। किसानों के प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह कर रहे थे, ने जिलाधिकारी से मिलकर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) पर गंभीर आरोप लगाए। किसानों का दावा है कि सड़क को चौड़ा करने के चक्कर में विभाग ने करीब डेढ़ किलोमीटर तक गड़ई नदी के प्राकृतिक बहाव को मिट्टी से पाट दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि अक्टूबर माह में हुई अतिवृष्टि के दौरान नदी का पानी प्राकृतिक रूप से नहीं निकल पाया और उफान के कारण पीडीडीयू नगर और सदर तहसील के सैकड़ों एकड़ में लगी फसलें जलमग्न होकर बर्बाद हो गईं।
विभागों में आपसी खींचतान: सिंचाई विभाग बनाम पीडब्ल्यूडी
इस प्रकरण में एक नया मोड़ तब आया जब सिंचाई विभाग ने भी लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। सिंचाई विभाग का आरोप है कि पीडब्ल्यूडी ने नदी क्षेत्र में कार्य करने के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली थी। वहीं, दूसरी ओर निर्माण खंड चंदौली के अधिशासी अभियंता कृष्ण कुमार का तर्क कुछ अलग है। उनका कहना है कि जिस हिस्से को 'ओल्ड गड़ई नदी' बताया जा रहा है, वह वास्तव में सड़क से सटा हुआ एक 'बाहा' (जल निकासी क्षेत्र) है, जिसे सड़क की मजबूती के लिए भरा जा रहा है।
अतिवृष्टि और बाढ़ से हुई तबाही की होगी समीक्षा
दीपावली से पूर्व हुई अचानक भारी बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी थी। मिर्जापुर और चंदौली के सीमावर्ती क्षेत्रों में गड़ई नदी के उफनाने से किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी इस मामले में संज्ञान लिया था और नदी की खुदाई के लिए धन अवमुक्त करने की बात कही थी। अब डीएम द्वारा गठित जांच टीम यह स्पष्ट करेगी कि क्या फसलों की बर्बादी का मुख्य कारण नदी का पाटा जाना ही था।
रिपोर्ट के बाद तय होगी दोषियों की जिम्मेदारी
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने स्पष्ट किया है कि जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यदि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी पाई गई या नदी के स्वरूप से छेड़छाड़ साबित हुई, तो संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, जिले के किसानों की नजरें अब जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो उनके मुआवजे और नदी के भविष्य का फैसला करेगी।
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