चंदौली के किसान अब औषधीय खेती से होंगे मालामाल, मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के तहत भारी सब्सिडी
चंदौली में पारंपरिक खेती छोड़ औषधीय पौधों को अपनाने वाले किसानों को सरकार 60 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दे रही है। कम लागत और अधिक मुनाफे वाली इस योजना से किसान अब आत्मनिर्भर बनेंगे।
औषधीय खेती पर किसानों को मिलेगा आकर्षक सरकारी अनुदान
दो हेक्टेयर की खेती पर ₹1.20 लाख तक की सब्सिडी
अश्वगंधा, मूसली और सतावरी जैसी फसलों पर विशेष फोकस
बाजार में बढ़ती हर्बल उत्पादों की मांग का मिलेगा लाभ
उद्यान विभाग देगा किसानों को मुफ्त तकनीकी मार्गदर्शन
चंदौली जिले में कृषि परिदृश्य को आधुनिक और लाभप्रद बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। 'मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना' के अंतर्गत अब किसानों को औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक फसलों जैसे धान और गेहूं के चक्र से बाहर निकालकर उनकी आय में वृद्धि करना है। औषधीय पौधों की मांग जिस तरह से वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है, उसे देखते हुए यह योजना किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
सब्सिडी का गणित और पात्रता
योजना के विस्तृत विवरण के अनुसार, जो किसान दो हेक्टेयर भूमि पर औषधीय फसलों की खेती करेंगे, उन्हें प्रति हेक्टेयर 60 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। यानी दो हेक्टेयर की खेती पर किसान को कुल 1.20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता सीधे तौर पर मिल सकती है। यह राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाएगी। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. शैलेंद्र देव दुबे ने बताया कि यह सब्सिडी किसानों के प्रारंभिक निवेश के बोझ को कम करने के लिए दी जा रही है।
सफेद मूसली और अश्वगंधा जैसी फसलों पर जोर
सरकार द्वारा दी जा रही इस सब्सिडी के दायरे में मुख्य रूप से सफेद मूसली, सतावरी, अश्वगंधा, तुलसी और मुलेठी जैसी उच्च मांग वाली फसलों को रखा गया है। इन पौधों की विशेषता यह है कि इनमें खाद, पानी और कीटनाशकों की जरूरत बहुत कम होती है, जिससे उत्पादन लागत घट जाती है। वर्तमान में आयुर्वेदिक उत्पाद, हर्बल दवाइयां और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में इन प्राकृतिक सामग्रियों की भारी मांग है, जिससे किसानों को बाजार में अपनी उपज की अच्छी कीमत मिलना तय है।
आवेदन की सरल और पारदर्शी प्रक्रिया
इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को उद्यान विभाग के निर्देशों का पालन करना होगा। इच्छुक किसानों को निम्नलिखित दस्तावेजों के साथ उद्यान विभाग में संपर्क करना होगा:---
आधार कार्ड और मोबाइल नंबर
बैंक पासबुक की फोटोकॉपी
भूमि से संबंधित खतौनी या दस्तावेज
दो पासपोर्ट साइज फोटो
उद्यान विभाग देगा तकनीकी मार्गदर्शन
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. शैलेंद्र देव दुबे का कहना है कि इच्छुक किसानों को केवल फॉर्म भरने तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि विभाग उन्हें भूमि परीक्षण और तकनीकी सुझाव भी देगा। फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक विशेषज्ञ किसानों का मार्गदर्शन करेंगे ताकि उत्पादन की गुणवत्ता वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। आवेदन स्वीकृत होने और खेती की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पारदर्शी तरीके से अनुदान राशि का भुगतान डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से किया जाएगा।
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