चंदौली मेडिकल कॉलेज को और बदनाम करने की हो रही है साजिश, डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस की खबरों पर मचा हड़कंप
चंदौली के बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस और मरीजों से वसूली के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। कॉलेज प्रशासन ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे छवि खराब करने की साजिश करार दिया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट!
चंदौली मेडिकल कॉलेज में घमासान तेज
निजी प्रैक्टिस के आरोपों पर मचा बवाल
प्राचार्य ने नोटिस जारी करने से नकारा
डॉक्टरों ने आरोपों को बताया पूरी तरह बेबुनियाद
निष्पक्ष जांच कराने की उठने लगी मांग
चंदौली जिले का बाबा कीनाराम स्वशासीय मेडिकल कॉलेज इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। एक तरफ जहां मेडिकल कॉलेज प्रशासन पढ़ाई और इलाज की व्यवस्था को बेहतर बनाने में लगातार जुटा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस और मरीजों के परिजनों से ऑपरेशन के नाम पर पैसे वसूलने की खबरों ने हड़कंप मचा दिया है। हालांकि, कॉलेज प्रशासन का साफ कहना है कि बिना किसी जांच और पुष्टि के उड़ाई जा रही ये खबरें संस्थान का नाम खराब करने की एक साजिश हैं।
व्यवस्था सुधारने की कोशिश में जुटा प्रशासन
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमित कुमार सिंह के नेतृत्व में अस्पताल और कॉलेज का माहौल सुधारने के लिए लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। जब भी मरीजों या तीमारदारों से शिकायत मिलती है, तो संविदा कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। इसके साथ ही नियमित डॉक्टरों के कामकाज की लगातार समीक्षा हो रही है और सभी विभागाध्यक्षों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति सावधान किया जा रहा है, ताकि आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।
निजी प्रैक्टिस की खबर से खड़ा हुआ नया विवाद
हाल ही में मीडिया में खबर छपी थी कि मेडिकल कॉलेज के 12 नियमित डॉक्टर चोरी-छिपे अपनी निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं। इस खबर में सिर्फ तीन डॉक्टरों के नाम ही सामने लाए गए, जबकि बाकी 9 डॉक्टरों के नाम उजागर नहीं किए गए। इसी बात को लेकर अस्पताल परिसर और पूरे जिले में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर आरोप सभी 12 डॉक्टरों पर थे, तो केवल कुछ ही डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक क्यों किए गए?
डॉक्टरों ने आरोपों को बताया पूरी तरह बेबुनियाद
खबर में जिन डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं, उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। डॉ. शोभित जैन का कहना है कि वे किसी भी तरह की निजी प्रैक्टिस नहीं करते हैं और इस मामले में उनका नाम घसीटना पूरी तरह गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी सस्ती लोकप्रियता और निजी स्वार्थ के लिए इस तरह की झूठी और भ्रामक खबरें फैला रहे हैं।
वहीं, सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार त्रिपाठी ने भी निजी प्रैक्टिस की बात को एकदम गलत बताया। उनका कहना है कि इस तरह की बेबुनियाद खबरों का मकसद सिर्फ मेडिकल कॉलेज और वहां काम करने वाले डॉक्टरों की साख को ठेस पहुंचाना है।
प्राचार्य ने किसी भी तरह का नोटिस देने से किया इनकार
इस पूरे मामले पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमित कुमार सिंह ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी तरफ से किसी भी डॉक्टर को निजी प्रैक्टिस के सिलसिले में कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है और न ही उन्होंने ऐसा कोई आधिकारिक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह गहन जांच का विषय है कि आखिर किस आधार पर ऐसी खबरें प्रकाशित की गईं। अगर कोई जानबूझकर संस्थान का नाम खराब करने की नीयत से झूठी बातें फैला रहा है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
मामले की निष्पक्ष जांच की उठ रही मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बाद से मेडिकल कॉलेज के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों की मानें तो कुछ लोग अपने निजी प्रभाव और फायदों को बचाए रखने के लिए इस तरह की खबरों को हवा देने का काम कर रहे हैं। हालांकि, इन बातों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच सबके सामने आ सके और गलत सूचना फैलाकर मेडिकल कॉलेज की छवि बिगाड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।
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