मनोज सिंह रक्षाबंधन कार्यक्रम पर कानाफूसी: महिलाओं ने लगाए अव्यवस्था के आरोप, पूर्व विधायक ने बताया साजिश
चंदौली में पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू द्वारा आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में अव्यवस्थाओं को लेकर कुछ महिलाओं ने नाराजगी जताई है। वहीं पूर्व विधायक ने इसे राजनीतिक विरोधियों की साजिश करार दिया है। पढ़िए पूरी खबर।
रक्षाबंधन कार्यक्रम में अव्यवस्था का आरोप
पूर्व विधायक मनोज डब्लू का पलटवार
भीड़ के चलते पैदा हुई असुविधा
तीन दिन बाद अफवाह फैलाने की साजिश
चंदौली की राजनीति में गरमाया मुद्दा
चंदौली जिले के सैयदराजा से पूर्व विधायक और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव मनोज सिंह डब्लू द्वारा बुधवार को आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम अब विवादों में आ गया है। कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची कुछ महिलाओं ने अव्यवस्थाओं को लेकर अपनी नाराजगी जताई है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया गया था, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद उन्हें बदइंतजामी के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

पानी और बैठने तक का इंतजाम न होने का आरोप
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं का आरोप है कि वहां उम्मीद से ज्यादा भीड़ उमड़ पड़ी थी, जिसे संभालने के लिए सही इंतजाम नहीं किए गए थे। स्थिति ऐसी बन गई कि कई बार भगदड़ जैसा माहौल देखने को मिला। महिलाओं का दावा है कि वहां न तो बैठने के लिए कुर्सी-चटाई की समुचित व्यवस्था थी और न ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था की गई थी। जिस सम्मान की आस लेकर वे आई थीं, उसकी जगह उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा।

पूर्व विधायक बोले- 3 दिन बाद रची जा रही साजिश
महिलाओं के इन आरोपों पर पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूरे मामले को अपने खिलाफ एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया। मनोज सिंह डब्लू ने कहा कि कार्यक्रम बुधवार को शांतिपूर्वक संपन्न हो गया था, लेकिन तीन दिन बाद इस मुद्दे को उछालना यह साफ दर्शाता है कि उनके चुनाव लड़ने वाले विरोधी इसे लेकर अफवाहें और भ्रम फैलाने में जुटे हुए हैं।
'विरोधियों की घबराहट का नतीजा हैं ये आरोप'
पूर्व विधायक ने आगे कहा कि रक्षाबंधन समारोह में भारी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति ही इस बात का सबूत है कि जनता के बीच उनका जुड़ाव और लोकप्रियता कितनी मजबूत है। कार्यक्रम की ऐतिहासिक सफलता को देखकर उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी घबरा गए हैं। यही वजह है कि अब महिलाओं का सहारा लेकर उनकी साख और लोकप्रियता पर सवाल उठाने का नाकाम प्रयास किया जा रहा है।
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