बिचौलियों के हाथ में 'धान का कटोरा': SDM को बंद मिला खुरहट क्रय केंद्र, पोर्टल पर शाम तक लगता रहा किसानों का अंगूठा
चंदौली के खुरहट धान क्रय केंद्र पर भ्रष्टाचार का अनोखा मामला सामने आया है। एसडीएम सदर के निरीक्षण में केंद्र बंद मिलने के बावजूद ऑनलाइन पोर्टल पर शाम तक खरीद जारी रही। इस खुलासे ने धान खरीद की पारदर्शिता और अधिकारियों की मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बंद केंद्र पर ऑनलाइन धान खरीद
एसडीएम के निरीक्षण में खुली पोल
300 कुंतल धान का फर्जीवाड़ा
बिचौलियों और राइस मिलों की सांठगांठ
कागजों पर सिमटी धान खरीद व्यवस्था
'धान का कटोरा' कहे जाने वाले चंदौली जनपद में धान खरीद की व्यवस्था एक बार फिर दागदार हुई है। बरौली ब्लॉक के खुरहट स्थित यूपीएसएस के धान क्रय केंद्र पर अनियमितता का ऐसा मामला सामने आया है जिसने जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को भी सोच में डाल दिया है। बुधवार दोपहर लगभग 1:20 बजे जब सदर तहसील की उप जिलाधिकारी (एसडीएम) ने खुरहट केंद्र का औचक निरीक्षण किया, तो वहां सन्नाटा पसरा था। केंद्र पर ताला लटका मिला और न तो वहां कोई किसान था, न ही कोई कर्मचारी और न ही धान की एक भी बोरी। एसडीएम ने तत्काल इस लापरवाही की रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दी।

शाम तक लगता रहा अंगूठा, 300 कुंतल का खेल
हैरानी की बात यह रही कि एसडीएम द्वारा केंद्र को बंद पाए जाने और रिपोर्ट भेजने के बावजूद, सरकारी पोर्टल पर खेल जारी रहा। पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, उसी बंद केंद्र पर शाम 5 बजे तक ऑनलाइन तरीके से धान की खरीद दिखाई जाती रही। किसानों के नाम पर बायोमेट्रिक सत्यापन (अंगूठा) भी लगता रहा और लगभग 300 कुंतल धान की खरीद दर्ज कर ली गई। यह घटना साबित करती है कि केंद्र के संचालक और बिचौलिए डिजिटल सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर कागजों पर ही लक्ष्य पूरा करने में जुटे हैं, जबकि धरातल पर सच्चाई इसके ठीक उलट है।

बिचौलियों और मिलर्स की 'जुगलबंदी' का आरोप
जनपद के किसानों का आरोप है कि जिले में संचालित 110 क्रय केंद्रों में से कई केंद्र केवल बिचौलियों के लिए काम कर रहे हैं। यूपीएसएस, विपणन विभाग और अन्य एजेंसियों की आड़ में बिचौलिए सक्रिय हैं, जो किसानों के नाम पर खुद ही कागजों पर खरीद दिखाकर धान सीधे राइस मिलों तक पहुँचा रहे हैं। असली किसान अपनी उपज बेचने के लिए आज भी दर-दर भटकने को मजबूर है। सिस्टम की जटिलता और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण किसान अपनी फसल बिचौलियों को सस्ते दामों पर बेचने पर विवश है, जिसका फायदा राइस मिलर्स उठा रहे हैं।
कड़ी कार्रवाई का इंतजार, व्यवस्था पर उठे सवाल
सदर उप जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि निरीक्षण के दौरान केंद्र पूरी तरह निष्क्रिय पाया गया था और इसकी विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी गई है। उन्होंने संबंधित केंद्र प्रभारी और एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब चंदौली में खरीद को लेकर सवाल उठे हों। अब देखना यह है कि जिला वितरण अधिकारी और अन्य उच्च अधिकारी इस डिजिटल फर्जीवाड़े पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या दोषियों पर वास्तव में गाज गिरेगी या फिर यह गंभीर घोटाला भी जांच की फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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