चंदौली में धान खरीद में भ्रष्टाचार और मौसम की दोहरी मार। बंद केंद्रों से खरीद का खुलासा होने के बाद भी लक्ष्य अधूरा। पढ़ें पूरी खबर।
धान के कटोरे चंदौली में धान खरीद की रफ्तार सुस्त है। एक तरफ कुदरत की मार है, तो दूसरी तरफ बंद केंद्रों से खरीद का बड़ा फर्जीवाड़ा। जानिए कैसे SDM की कार्रवाई ने खोला भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा।
सदर SDM दिव्या ओझा ने पकड़ा बंद केंद्रों से खरीद का खेल
दलालों और राइस मिलर्स की सेटिंग से विभाग की किरकिरी
2.25 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 97 हजार की खरीद
बेमौसम बारिश और नमी के कारण किसान केंद्रों से बना रहे दूरी
130 क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा, 15 हजार किसानों ने ही बेचा धान
चंदौली जिला, जो अपनी उपजाऊ भूमि के कारण 'धान का कटोरा' कहलाता है, इन दिनों धान खरीद की विसंगतियों को लेकर सुर्खियों में है। शासन ने इस वर्ष जिले के लिए 2.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, लेकिन हकीकत यह है कि विभाग अब तक आधे लक्ष्य तक भी नहीं पहुंच पाया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक महज 97 हजार मीट्रिक टन के करीब ही खरीद हो सकी है। विभागीय सुस्ती के बीच भ्रष्टाचार की खबरों ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एसडीएम की छापेमारी से भ्रष्टाचार का खुलासा
धान खरीद में पारदर्शिता के दावों की पोल तब खुली जब सदर की उपजिलाधिकारी (SDM) दिव्या ओझा ने जिले में चल रहे एक बड़े खेल का पर्दाफाश किया। जांच में यह सामने आया कि दलालों और राइस मिलर्स की मिलीभगत से उन केंद्रों पर भी कागजी खरीद दिखाई जा रही थी जो धरातल पर बंद पड़े थे। इस सेटिंग के जरिए सरकारी धन के बंदरबांट की कोशिश की जा रही थी। एसडीएम की इस सख्त कार्रवाई के बावजूद, विभागीय अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं क्योंकि फर्जीवाड़े और वास्तविक खरीद के बीच का अंतर लक्ष्य प्राप्ति में बड़ी बाधा बन रहा है।
130 केंद्रों में से अधिकांश पर पसरा सन्नाटा
जिले में कुल 130 क्रय केंद्र संचालित हैं, जिनमें खाद्य विभाग से लेकर पीसीएफ और मंडी समिति जैसी एजेंसियां शामिल हैं। एक नवंबर से शुरू हुई प्रक्रिया में अब तक केवल 15,536 किसानों ने ही पंजीकरण कराकर अपनी फसल बेची है। हालांकि विभाग का दावा है कि 65 प्रतिशत खरीदे गए धान का उठान मिलरों को भेज दिया गया है, लेकिन धरातल पर किसानों का उत्साह कम नजर आ रहा है। इसका एक प्रमुख कारण बेमौसम बारिश और तूफानी हवाएं भी हैं, जिससे फसल में नमी बढ़ गई है और किसान अपनी उपज केंद्रों तक ले जाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
लक्ष्य प्राप्ति और साख बचाने की चुनौती
विभागीय उदासीनता और बिचौलियों के हस्तक्षेप के कारण इस बार 2.25 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य प्राप्त करना नामुमकिन सा लग रहा है। एक तरफ जहां प्राकृतिक आपदा ने उत्पादन प्रभावित किया है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक तंत्र में मौजूद कमियों ने असली किसानों के बजाय दलालों को फलने-फूलने का मौका दे दिया है। अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी इस भ्रष्टाचार पर कितनी लगाम लगा पाते हैं और क्या वास्तविक किसानों को उनकी फसल का उचित दाम समय पर मिल पाएगा।
राघवेंद्र सिंह का दावा
चंदौली जिले के उपसंभागीय विपणन अधिकारी राघवेंद्र सिंह का दावा है कि इस साल भी शासन के मंशा के अनुसार जिले में लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत धान की खरीद करने को लेकर हर स्तर से कोशिश की जा रही है। मौसम ठीक होते ही धान खरीद की प्रगति में भी तेजी आने की उम्मीद है। क्रय केंद्र प्रभारियों को शतप्रतिशत खरीद के निर्देश दिए गए है। जहां कहीं शिकायतें हैं, वहां कार्रवाई भी की जा रही है।
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