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चंदौली के हर ब्लॉक और तहसील में बनेंगे पक्के हेलीपैड: 30 लाख खर्च करके VIP मूवमेंट व अन्य फायदों को गिनाने की कोशिश

चंदौली जिला प्रशासन अब हर तहसील और विकासखंड में स्थायी हेलीपैड का निर्माण कराने जा रहा है। 30 लाख रुपये की लागत से बनने वाले ये हेलीपैड न केवल वीआईपी दौरों को सुगम बनाएंगे, बल्कि बाढ़ जैसी आपदाओं में जीवन रक्षक साबित होंगे।

 
 

हर तहसील ब्लॉक में स्थायी हेलीपैड

आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई मजबूती

पीडब्ल्यूडी विभाग संभालेगा निर्माण की जिम्मेदारी

नाइट लैंडिंग सुविधाओं से लैस हेलीपैड

30 लाख रुपये की अनुमानित लागत

चंदौली में सुदृढ़ होगी हवाई कनेक्टिविटी: अब हर तहसील और ब्लॉक मुख्यालय पर बनेंगे स्थायी हेलीपैड

उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद में बढ़ते वीआईपी मूवमेंट, पर्यटन की संभावनाओं और आपदा प्रबंधन की अनिवार्य जरूरतों को देखते हुए शासन ने एक दूरगामी निर्णय लिया है। अब जिले की सभी पाँच तहसीलों और नौ विकासखंडों में स्थायी हेलीपैड का निर्माण किया जाएगा। जिला प्रशासन इस महत्वाकांक्षी योजना का खाका तैयार करने में जुट गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के दौरों के समय बार-बार अस्थायी हेलीपैड बनाने के खर्च और समय को बचाना है। साथ ही, चंदौली जैसे भौगोलिक रूप से विविधता वाले जिले में आपात स्थिति में हवाई सेवाओं का त्वरित लाभ उठाना भी प्राथमिकता है।

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जिलाधिकारी ने भूमि चयन और डीपीआर के दिए सख्त निर्देश
 जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सभी उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) और खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को हाई अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने स्पष्ट किया है कि हेलीपैड के लिए ऐसी भूमि का चयन किया जाए जो मुख्यालय के निकट हो, पूरी तरह से विवाद-मुक्त हो और तकनीकी रूप से सुरक्षित लैंडिंग के मानकों पर खरी उतरती हो। भूमि चिह्नांकन का कार्य राजस्व विभाग द्वारा युद्धस्तर पर किया जा रहा है। जमीन उपलब्ध होते ही लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा विस्तृत कार्ययोजना (DPR) तैयार कर शासन को स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी।

पीडब्ल्यूडी संभालेगा निर्माण, तकनीकी मानकों का होगा पालन
 स्थायी हेलीपैड के निर्माण की मुख्य जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई है। विभाग के अधिशासी अभियंता कृष्ण कुमार के अनुसार, ये हेलीपैड पूर्ण तकनीकी मानकों पर आधारित होंगे। प्रस्तावित नक्शे के अनुसार, हेलीपैड का आउटर सर्कल 40×40 मीटर और इनर सर्कल 20×20 मीटर का होगा। इसके केंद्र में 'H' का स्पष्ट चिह्न अंकित किया जाएगा ताकि पायलट को ऊंचाई से स्पष्ट दिखाई दे सके। इन हेलीपैडों में मजबूत कंक्रीट की सतह, स्टील सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ नाइट लैंडिंग के लिए विशेष लाइटिंग और आग से सुरक्षा हेतु अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

लाखों के खर्च के बाद होगा बहुआयामी फायदा 
वित्तीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो एक अस्थायी हेलीपैड बनाने में भी 6 से 7 लाख रुपये का खर्च आता है, जो कार्यक्रम के बाद व्यर्थ हो जाता है। इसके विपरीत, लगभग 25 से 30 लाख रुपये की लागत से बनने वाला एक स्थायी हेलीपैड लंबे समय तक सेवा देगा। यह निवेश न केवल प्रशासनिक कार्यों को गति देगा, बल्कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत सामग्री पहुँचाने और रेस्क्यू ऑपरेशन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। इसके अलावा, चंदौली के पर्यटन स्थलों पर आने वाले हाई-प्रोफाइल पर्यटकों और निवेशकों के लिए भी यह बुनियादी ढांचा मील का पत्थर साबित होगा।

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