चंदौली में 'स्टार वार': अनुभवी इंस्पेक्टर ढो रहे हैं फाइलें, युवा दरोगाओं के कंधों पर कई बड़े थानों की कमान, आखिर क्यों..?
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में पुलिस कमान को लेकर 'डबल स्टार' और 'ट्रिपल स्टार' अधिकारियों के बीच खींचतान जारी है। एसपी के नए फॉर्मूले से थानों में दरोगाओं का दबदबा बढ़ गया है।
चंदौली के थानों में 2015 बैच के दरोगाओं का वर्चस्व
फाइलों तक सिमट कर रह गए अनुभवी 'ट्रिपल स्टार' इंस्पेक्टर
नवागत एसपी आकाश पटेल ने फील्ड परफॉर्मेंस को माना कमान का आधार
'जुगाड़ लगाओ, थाना पाओ की जगह पसीना बहाओ, चार्ज पाओ' नीति पर अमल
उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद में पुलिसिंग के नए पैटर्न ने महकमे के भीतर एक नई चर्चा छेड़ दी है। जिले में इन दिनों 'डबल स्टार' (उप-निरीक्षक) बनाम 'ट्रिपल स्टार' (निरीक्षक) के बीच कमान को लेकर खींचतान साफ देखी जा सकती है। वर्तमान में जिले के अधिकांश महत्वपूर्ण थानों की जिम्मेदारी युवा और तेज-तर्रार दरोगा संभाल रहे हैं, जबकि अनुभवी निरीक्षक (इंस्पेक्टर) थानों के बजाय पुलिस कार्यालयों में फाइलें ढोने या विवेचनाओं के नाम पर समय काटने को मजबूर हैं।

फाइल ढोने वाले सीनियर इंस्पेक्टर आधा दिन लाइन में और आधा दिन अपने एसी वाले निजी कमरे पर बिता रहे हैं। अगर किसी को रास्ते में मिल गए तो कहते हैं कि क्या करें..अब हमारे पास कोई काम ही नहीं है। गर्मी में पंखे के नीचे ऑफिस में बैठने से अच्छा है..घर में आराम किया जाए। जब कप्तान साहब हम लोगों से काम चाहते ही नहीं हैं..तो हम बेवजह क्यों परेशान हों।

जिले में ऐसी चर्चा है कि इसी के चलते पुलिस अधिकारियों के कार्य अनुभव का लाभ जिले को उस स्तर पर नहीं मिल पा रहा है, जिसकी उम्मीद की जाती है। पेश है चंदौली जिले से फैजान अहमद के साथ विनय तिवारी की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट...
एसपी आकाश पटेल का कड़ा रुख: 'पसीना बहाओ, चार्ज पाओ'
नवागत पुलिस कप्तान आकाश पटेल ने इस व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का दो-टूक जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पद और स्टार देखकर जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। एसपी का तर्क है कि कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए वह केवल उन्हीं अधिकारियों (चाहे वे निरीक्षक हों या उप-निरीक्षक) को कोतवाली या थानों की कमान सौंप रहे हैं जो फील्ड में एक्टिव हैं और जिनमें समस्या निपटाने की विशेष कार्यकुशलता है। कप्तान ने अपने मातहतों को सीधा चैलेंज दिया है कि यदि किसी को थाने या चौकी का चार्ज चाहिए, तो उसे मैदान में उतरकर अपना कौशल साबित करना होगा।

थानों की वर्तमान स्थिति: किसके हाथ में है कमान?
जिले के 16 थानों की वर्तमान सूची पर नजर डालें तो दरोगाओं का वर्चस्व साफ झलकता है। 2015 बैच के सब-इंस्पेक्टर सबसे ज्यादा थानों की कमान संभाल रहे हैं। वर्तमान सूची इस प्रकार है:
निरीक्षक (Inspector): धीना (दिलीप श्रीवास्तव), धानापुर (त्रिवेणी लाल सेन), चंदौली (बिंदेश्वरी पाण्डेय), अलीनगर (घनश्याम शुक्ला), बबुरी (विनोद मिश्रा) और नौगढ़ (प्रमोद यादव)।
उप-निरीक्षक (Sub-Inspector): कंदवा (राजीव मल), सकलडीहा (भूपेंद्र कुमार निषाद), बलुआ (अरुण सिंह), सैयदराजा (अशोक मिश्रा), मुगलसराय (विजय प्रताप सिंह), चकिया (अर्जुन सिंह), चकरघट्टा (संतोष कुमार), शहाबगंज (प्रियंका सिंह), इलिया (चंदन राय) और महिला थाना (पूजा कौर)।
जिले के सभी थानों पर वर्तमान स्थिति में तैनाती की पूरी सूची:
1. चंदौली कोतवाली – बिंदेश्वरी पाण्डेय- इंस्पेक्टर
2. धीना थाना – दिलीप श्रीवास्तव इंस्पेक्टर
3. धानापुर थाना – त्रिवेणी लाल सेन - इंस्पेक्टर
4. अलीनगर थाना – घनश्याम शुक्ला- इंस्पेक्टर
5. नौगढ़ थाना – प्रमोद यादव- इंस्पेक्टर
6. बबुरी थाना – विनोद मिश्रा-इंस्पेक्टर
7. सकलडीहा कोतवाली– भूपेन्द्र कुमार निषाद, सब-इंस्पेक्टर
8. कंदवा थाना – राजीव मल- सब इंस्पेक्टर
9. बलुआ थाना – अरुण सिंह- सब इंस्पेक्टर
10. सैयदराजा कोतवाली – अशोक मिश्रा- सब इंस्पेक्टर
11. मुगलसराय कोतवाली– विजय प्रताप सिंह- सब इंस्पेक्टर
12 . चकिया कोतवाली – अर्जुन सिंह- सब इंस्पेक्टर
13. चकरघट्टा थाना– संतोष कुमार- सब इंस्पेक्टर
14. शहाबगंज थाना – प्रियंका सिंह- सब इंस्पेक्टर
15. इलिया थाना – चन्दन राय- सब इंस्पेक्टर
16. महिला थाना – पूजा कौर- सब इंस्पेक्टर
जानिए तैनाती के पीछे की असली वजह
जिले में स्वीकृत पदों की तुलना में वर्तमान में अधिकारियों की संख्या काफी अधिक है। एसपी के अनुसार, जिले में 39 के स्थान पर 48 निरीक्षक तैनात हैं (9 अधिक)। इसी तरह 275 के सापेक्ष 375 उप-निरीक्षक और 10 महिला उप-निरीक्षक तैनात हैं, जो स्वीकृत संख्या से लगभग 110 अधिक हैं। एसपी आकाश पटेल ने स्वीकार किया कि जिले में फिलहाल तेज-तर्रार निरीक्षकों की कमी है, जिसके कारण सब-इंस्पेक्टर्स को थानों का चार्ज दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह विभाग से और अधिक कार्यकुशल इंस्पेक्टरों की मांग करेंगे।
मुस्लिम दरोगाओं की तैनाती न करने पर भी सवाल
महकमे के गलियारों में एक और चर्चा जोरों पर है कि पिछले डेढ़ वर्षों से किसी भी मुस्लिम दरोगा को न तो चौकी प्रभारी बनाया गया है और न ही थाना अध्यक्ष। पूर्व एसपी डॉ. अनिल कुमार के कार्यकाल में मुस्लिम अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी जाती थी, लेकिन वर्तमान में यह संतुलन बिगड़ा हुआ नजर आ रहा है। फिलहाल, एसपी का पूरा ध्यान 'प्रोफेशनल पुलिसिंग' पर है, जहां जाति या धर्म के बजाय केवल परफॉरमेंस को ही वरीयता दी जा रही है।
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